पराए मर्द के लिए करवा चौथ, पति से शारीरिक दूरी...'क्रूरता मानते हुए कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

जयपुर फैमिली कोर्ट-2 ने विवाहित होते हुए दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखने और दांपत्य सुख से वंचित रखने को व्यभिचार और मानसिक क्रूरता माना है। कोर्ट ने पति की तलाक अर्जी मंजूर की।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
October 27, 2026 • 12:02 PM  99
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राजस्थान
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पराए मर्द के लिए करवा चौथ, पति से शारीरिक दूरी...'क्रूरता मानते हुए कोर्ट ने मंजूर किया तलाक
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पराए मर्द के लिए करवा चौथ, पति से शारीरिक दूरी...'क्रूरता मानते हुए कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

जयपुर की फैमिली कोर्ट-2 ने वैवाहिक संबंधों और तलाक को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि एक विवाहित महिला द्वारा किसी पराए पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखना, उसके नाम की मेहंदी लगाना और उसे पति के रूप में स्वीकार करना सीधे तौर पर व्यभिचार (एडल्ट्री) है। इस आचरण और मानसिक क्रूरता को आधार बनाते हुए कोर्ट ने पति की तलाक की अर्जी को स्वीकार कर लिया है और मई 2013 में हुई 13 साल पुरानी शादी को कानूनी रूप से खत्म कर दिया है।

गोवा में लिए फेरे, पार की सामान्य दोस्ती की सीमाएं

इस मामले की सुनवाई करते हुए जज विशाल भार्गव ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से बताया कि पत्नी ने अदालत में खुद यह बात स्वीकार की है कि उसने गोवा जाकर एक अन्य पुरुष के साथ फेरे लिए और उसके साथ बिल्कुल वैसा ही आचरण किया जैसा एक वैवाहिक रिश्ते में होता है। कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी में कहा कि महिला का यह व्यवहार किसी भी नजरिए से 'सामान्य दोस्ती' नहीं माना जा सकता, बल्कि यह वैवाहिक निष्ठा का पूरी तरह से उल्लंघन है।

शारीरिक संबंध से दूरी और परिजनों का अपमान 'मानसिक क्रूरता'

अदालत ने केवल व्यभिचार ही नहीं, बल्कि पत्नी के अन्य व्यवहारों को भी पति के प्रति गहरी मानसिक क्रूरता माना। फैसले के अनुसार, पत्नी ने लंबे समय तक पति को दांपत्य सहचर्य (फिजिकल रिलेशन) से दूर रखा। इसके अतिरिक्त, उसने वैवाहिक घर में अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया, नाबालिग बेटे की उचित परवरिश की उपेक्षा की और पति के माता-पिता के साथ भी लगातार अनुचित और अपमानजनक बर्ताव किया। कोर्ट ने माना कि घटनाओं की इस पूरी श्रृंखला ने पति का भरोसा तोड़ दिया, जिससे वैवाहिक जीवन में मानसिक शांति बनाए रखना उसके लिए असंभव हो गया था।

तलाक और क्रूरता पर जयपुर फैमिली कोर्ट के हालिया अहम फैसले 

जयपुर की अदालतों ने हाल ही में क्रूरता को लेकर कई कड़े फैसले दिए हैं:

  • जुलाई 2026 (जयपुर महानगर प्रथम फैमिली कोर्ट-5): बीमार पति की देखभाल न करने को अदालत ने क्रूरता और अमानवीय व्यवहार मानते हुए पति की तलाक की अर्जी को मंजूरी दी।

  • फरवरी 2026 (जयपुर फैमिली कोर्ट): बिना किसी ठोस कारण के जीवनसाथी से अलग रहने और मानसिक-शारीरिक क्रूरता के आधार पर एक 32 साल पुरानी शादी को रद्द किया गया।

  • जून 2025 (जयपुर महानगर प्रथम फैमिली कोर्ट-4): शादी के बाद शारीरिक संबंध न बनाने को सीधे तौर पर मानसिक क्रूरता की श्रेणी में रखा गया और इस आधार पर पति को विवाह विच्छेद (तलाक) की मंजूरी दी गई।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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