लोकसभा में 'VB-G RAM G' बिल पेश: विपक्ष का तीव्र विरोध, कांग्रेस ने बताया गांधीजी का अपमान

लोकसभा में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पेश 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025' मनरेगा को रिप्लेस करेगा, जिसमें रोजगार गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और शशि थरूर ने महात्मा गांधी का नाम हटाने और योजना को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध किया, इसे गांधीजी का अपमान बताया। सदन में हंगामा हुआ और विपक्ष ने बिल वापस लेने या समिति को भेजने की मांग की।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
December 16, 2025 • 1:44 PM  15
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लोकसभा में 'VB-G RAM G' बिल पेश: विपक्ष का तीव्र विरोध, कांग्रेस ने बताया गांधीजी का अपमान
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16 Dec 2025
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लोकसभा में 'VB-G RAM G' बिल पेश: विपक्ष का तीव्र विरोध, कांग्रेस ने बताया गांधीजी का अपमान

नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025: लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 पेश किया। यह बिल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA, 2005) को पूरी तरह निरस्त कर नई योजना की जगह लेगा। बिल पेश होते ही सदन में हंगामा शुरू हो गया, विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध किया। कांग्रेस ने इसे महात्मा गांधी का अपमान और ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर हमला बताया।

बिल की मुख्य विशेषताएं रोजगार गारंटी: मौजूदा मनरेगा में 100 दिन की गारंटी थी, नई योजना में इसे बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। फोकस क्षेत्र: जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े कार्य और जलवायु परिवर्तन से निपटने के विशेष कार्यों पर जोर। डिजिटल और पारदर्शिता: सभी संपत्तियों को 'विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक' में एकीकृत किया जाएगा, जियो-टैगिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग अनिवार्य। फंडिंग: केंद्र का हिस्सा घटाकर 60% और राज्यों का 40% करने का प्रस्ताव (मनरेगा में केंद्र 90-100% वहन करता था)। उद्देश्य: विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप ग्रामीण सशक्तिकरण, विकास और आत्मनिर्भरता पर फोकस। सरकार इसे मनरेगा का 'अपग्रेडेड वर्जन' बता रही है। शिवराज सिंह चौहान ने बिल पेश करते हुए कहा कि गांधीजी खुद 'राम राज्य' की बात करते थे और बापू दिल में बसते हैं। उन्होंने मनरेगा के पिछले 20 वर्षों के योगदान को स्वीकार किया, लेकिन ग्रामीण भारत में आए बदलावों के मद्देनजर नई योजना जरूरी बताया।

विपक्ष का विरोध: प्रियंका गांधी और शशि थरूर के बयान बिल पेश होने के तुरंत बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सदन में इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा:"हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती। इससे फिजूलखर्ची होती है – स्टेशनरी, ऑफिस बदलने में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।" "महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं, पूरे देश के हैं। उनका नाम हटाना गलत है। यह बिल ग्रामीण मजदूरों के कानूनी अधिकारों को कमजोर करेगा।" "बिना चर्चा, बिना सलाह के बिल पास न करें। इसे वापस लें या कम से कम स्थायी समिति को भेजें। कोई विधेयक निजी महत्वाकांक्षा या पूर्वाग्रह पर आधारित नहीं होना चाहिए।" प्रियंका ने इसे केंद्र की नियंत्रण बढ़ाने और जिम्मेदारियां घटाने की कोशिश बताया, साथ ही पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी विरोध जताया:"महात्मा गांधी का नाम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्राम स्वराज और राम राज्य गांधीजी की चेतना के दो स्तंभ थे, कभी प्रतिस्पर्धी नहीं।" "राम का नाम बदनाम न करें। ग्रामीण गरीबों की योजना से गांधीजी का नाम हटाना उनकी विरासत का अपमान है।" कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे 'बीजेपी-आरएसएस की साजिश' बताया और कहा कि गांधीजी का नाम हटाना मोदीजी के विदेशों में बापू को श्रद्धांजलि देने की पाखंड को उजागर करता है।अन्य विपक्षी दलों जैसे टीएमसी ने भी विरोध किया। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि भगवान राम सम्मानित हैं, लेकिन गांधीजी का नाम हटाकर ऐसा नहीं करना चाहिए।

राजनीतिक विवाद के मुख्य बिंदु नाम बदलने का आरोप: विपक्ष का कहना है कि मोदी सरकार यूपीए की योजनाओं से गांधी-नेहरू नाम हटाने की पुरानी आदत दोहरा रही है। अधिकारों पर हमला: मनरेगा डिमांड-ड्रिवन था (मांग के आधार पर बजट बढ़ सकता था), नई योजना सप्लाई-ड्रिवन होगी (केंद्र तय करेगा बजट और क्षेत्र)। राज्यों पर बोझ: फंडिंग में राज्यों का हिस्सा बढ़ने से गैर-बीजेपी शासित राज्य नाराज। सरकार का पक्ष: यह योजना पारदर्शी, आधुनिक और विकसित भारत के अनुरूप है। मनरेगा में भ्रष्टाचार और कमियां थीं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है। 

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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