राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन जोरदार सियासी घमासान देखने को मिला। सरकारी स्कूलों में मीडिया और कैमरों की एंट्री बैन किए जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस विधायकों ने सड़क से लेकर विधानसभा तक जोरदार प्रदर्शन किया। पोद्दार मूक-बधिर स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च निकालने के बाद कांग्रेसी नेता जब अंदर जाने लगे, तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके विरोध में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और सचिन पायलट समेत तमाम विधायक विधानसभा गेट के बाहर धरने पर बैठ गए।
इधर हंगामे और विपक्ष की गैर-मौजूदगी के बीच सदन की कार्यवाही केवल 21 मिनट ही चल सकी। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
कांग्रेस विधायक सुबह त्रिमूर्ति सर्किल स्थित पोद्दार मूक-बधिर स्कूल पहुंचे थे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि 15 दिन पहले जब वे स्कूल आए थे, तब वहां बदहाली थी और सुधार का वादा किया गया था। लेकिन अब वहां नो-एंट्री का बोर्ड लगा दिया गया है ताकि मीडिया और जनप्रतिनिधि खामियां न देख सकें।
इसके बाद विधायकों ने विधानसभा की ओर पैदल मार्च शुरू किया। विधानसभा के गेट नंबर 6 पर सुरक्षाबलों ने बैरिकेडिंग कर विधायकों को रोका, जिसके बाद पुलिस और नेताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई। कुछ नेता बैरिकेड्स पर भी चढ़ गए और वहीं धरने पर बैठ गए।
कांग्रेस नेताओं के बड़े आरोप: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
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टीकाराम जूली (नेता प्रतिपक्ष): "बीजेपी अपने पाप छुपाने के लिए यह 'ढक्कन कानून' लाई है। प्रदेश में 3,768 स्कूल जर्जर हैं, 85 हजार कमरे टूटे पड़े हैं और सवा लाख शिक्षकों के पद खाली हैं। पिपलोदी हादसे के बाद भी सरकार नहीं चेती। हम गेट बंद करने के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देंगे।"
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गोविंद सिंह डोटासरा (पीसीसी चीफ): "सरकार पूरी तरह तानाशाही पर उतर आई है। शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और ट्रांसफर के नाम पर उगाही चल रही है। 3 हजार स्कूलों में शिक्षक और टॉयलेट तक नहीं हैं। RSS के एजेंडे को स्कूलों में थोपा जा रहा है।"
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सचिन पायलट (वरिष्ठ कांग्रेस नेता): "झालावाड़ जैसे हादसों के बाद भी सरकार सुधारने के बजाय सच छुपाने में लगी है। पत्रकारों को रोकने का फैसला पूरी तरह अस्वीकार्य है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।"
सत्ता पक्ष का पलटवार: 'लोकतंत्र की हत्या और वंदे मातरम से बचने का बहाना'
विपक्ष के धरने पर सत्ता पक्ष ने तीखा हमला बोला:
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जोगेश्वर गर्ग (सरकारी मुख्य सचेतक): "विपक्ष बिना किसी कारण के सदन से गैर-हाजिर रहा। अगर वे समय पर आते तो उन्हें पूरा 'वंदे मातरम' गाना पड़ता, जिसे टालने के लिए उन्होंने सदन का बहिष्कार किया।"
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जोगाराम पटेल (संसदीय कार्य मंत्री): "सर्वदलीय बैठक में सदन शांति से चलाने पर सहमति बनी थी, लेकिन विपक्ष ने स्पीकर के आदेश की अवहेलना कर लोकतंत्र का अपमान किया है।"
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वासुदेव देवनानी (विधानसभा अध्यक्ष): सदन में विपक्ष की गैर-मौजूदगी पर स्पीकर ने दुख जताया और कहा कि मार्शलों ने विधायकों को एक-एक कर अंदर आने को कहा था, लेकिन वे नहीं माने।
सदन में 2 नए बिल पेश, 10 पुराने बिल राज्यपाल ने लौटाए
हंगामे के बीच सदन के पटल पर दो महत्वपूर्ण विधेयक रखे गए—
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गीतांजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय जयपुर विधेयक
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राजस्थान वृक्ष संरक्षण विधेयक
इसके अलावा, राज्यपाल ने पूर्ववर्ती सरकारों के 10 बिल पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिए हैं। इनमें गहलोत सरकार के समय का 'मॉब लिंचिंग रोकथाम बिल' और वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल का 1 बिल शामिल है।
मानगढ़ धाम को लेकर BAP का भी प्रदर्शन
मानसून सत्र के पहले दिन भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायकों ने भी विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। BAP विधायकों ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग उठाई और केंद्र सरकार पर आदिवासियों की उपेक्षा का आरोप लगाया।