पंचायत चुनाव से पहले 75 हजार की रिश्वत, वीडियो बनते ही भागे अधिकारी
राजस्थान के बाड़मेर में पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगने से ठीक पहले पट्टों के नाम पर रिश्वत का बड़ा खेल सामने आया है। धनाऊ के बामनोर में वीडीओ (VDO) पर 5-5 हजार रुपये वसूलने का आरोप है। शिकायत के बाद पैसे लौटाने पहुंचे अधिकारियों का वीडियो वायरल।
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
October 4, 2026 • 4:17 PM 179
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“पंचायत चुनाव से पहले 75 हजार की रिश्वत, वीडियो बनते ही भागे अधिकारी”
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4 Oct 2026
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राजस्थान में पंचायती राज चुनावों की सरगर्मियों के बीच बाड़मेर जिले से भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसने पूरे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला धनाऊ क्षेत्र के बामनोर गांव का है, जहां आचार संहिता लागू होने से महज चंद घंटे पहले ग्रामीणों से आवासीय पट्टों के नाम पर खुलेआम रिश्वतखोरी की गई। अब इस मामले का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें अधिकारी घबराहट में पैसे लौटाते और कैमरे से बचकर भागते नजर आ रहे हैं।
2 अक्टूबर की छुट्टी के दिन कार्यालय बुलाकर मांगे पैसे
जानकारी के अनुसार, बामनोर गांव के ग्रामीणों को 2 अक्टूबर के दिन ग्राम विकास अधिकारी (VDO) ने कार्यालय बुलाया। ग्रामीणों को बताया गया कि उनके आवासीय पट्टे तैयार हैं। लेकिन आरोप है कि ये पट्टे सरकारी प्रक्रिया के तहत निशुल्क नहीं दिए जा रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि वी़डीओ ने प्रति पट्टा 5,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। लंबे समय से पट्टों का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने सोचा कि आचार संहिता लगने और नई सरकार बनने से पहले पट्टा ले लेना ही समझदारी है। मजबूरी में ग्रामीणों ने वी़डीओ के निर्देशानुसार किसी अन्य व्यक्ति के फोन-पे (PhonePe) नंबर पर कुल 75,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
भ्रष्टाचार की इस कहानी में असली मोड़ तब आया जब गांव के ही एक जागरूक व्यक्ति ने इस पूरी धांधली की शिकायत सीधे चौहटन विधायक से कर दी। उच्च स्तर पर शिकायत की भनक लगते ही भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। खुद को फंसता देख ग्राम विकास अधिकारी अपने एक एलडीसी (LDC) साथी के साथ आनन-फानन में ग्रामीणों के घर पहुंच गए।
34 हजार रुपये वापस थमाने की कोशिश, वीडियो बनते ही भागे
ग्रामीणों के अनुसार, वी़डीओ और एलडीसी एक घर पहुंचे और मामले को रफा-दफा करने के लिए 34,000 रुपये नकद वापस थमाने लगे। उन्होंने ग्रामीणों से मिन्नतें कीं कि वे ये पैसे रख लें और मामला खत्म करें। लेकिन ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब उन्होंने फोन-पे के जरिए 75,000 रुपये दिए थे, तो सिर्फ 34,000 रुपये ही क्यों लौटाए जा रहे हैं?
इसी दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों की इस घबराहट और पैसे लौटाने की कोशिश का अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। कैमरा चालू होते ही वी़डीओ और एलडीसी के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं और वे बिना कोई जवाब दिए वहां से उल्टे पांव भाग खड़े हुए।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने बाड़मेर प्रशासन और पंचायती राज विभाग पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
आचार संहिता से ठीक पहले की जल्दबाजी: 3 अक्टूबर को पंचायती राज चुनावों की आचार संहिता लागू होनी थी। ऐसे में 2 अक्टूबर (राष्ट्रीय अवकाश) को कार्यालय बुलाकर पट्टे बांटने की इतनी जल्दबाजी क्यों थी?
खुलेआम वसूली की हिम्मत: एक जिम्मेदार ग्राम विकास अधिकारी बिना किसी खौफ के ग्रामीणों से 5-5 हजार रुपये की अवैध वसूली कैसे कर रहा था?
पैसे नहीं लिए तो भागे क्यों?: यदि रिश्वत नहीं ली गई थी, तो शिकायत के तुरंत बाद अधिकारी ग्रामीणों के घर पैसे लौटाने क्यों पहुंचे? और वीडियो बनते ही वहां से भागने की क्या जरूरत थी?
प्रशासन के संज्ञान का इंतजार
यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं है, बल्कि चुनाव से पहले सिस्टम में मौजूद भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। रिश्वतखोरी का यह वीडियो क्षेत्र में तेजी से वायरल हो रहा है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों के इन गंभीर आरोपों और वायरल साक्ष्यों के बाद बाड़मेर का उच्च प्रशासन और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) इन दागी अधिकारियों के खिलाफ क्या और कब सख्त कार्रवाई करता है।