शाही खाने से मोदी ने जीता दुनिया का दिल, 7 साल बाद जिनपिंग की भारत में एंट्री
भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की 'डिनर डिप्लोमेसी' ने महफ़िल लूट ली। वहीं, आतंकवाद के खिलाफ सदस्य देशों ने कड़ा रुख अपनाया है। जानें मोदी के 5 बड़े प्रस्ताव और 7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग से जुड़ी बड़ी बातें।
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
September 13, 2026 • 5:59 PM 3
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13 Sep 2026
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भारत की मेजबानी में चल रहे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर एक नया अध्याय लिख दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ शानदार 'डिनर डिप्लोमेसी' के जरिए दुनिया भर के नेताओं के बीच अनौपचारिक संवाद का मंच तैयार किया, बल्कि कूटनीतिक सूझबूझ से आतंकवाद के खिलाफ सभी सदस्य देशों को एक मंच पर ला खड़ा किया है। इसके अलावा, गलवान घाटी विवाद के बाद पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचे हैं, जो इस समिट की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में से एक है।
आइए विस्तार से जानते हैं ब्रिक्स समिट की अहम बातें और भारत मंडपम में क्या-क्या हुआ:
भारत मंडपम में शाही सत्कार और 'डिनर डिप्लोमेसी'
औपचारिक बैठकों के तनाव को कम करने और नेताओं के बीच आपसी भरोसा बढ़ाने के लिए शनिवार रात भारत मंडपम में एक विशेष डिनर का आयोजन किया गया। इस भोज में ब्रिक्स नेताओं के अलावा केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।
शाही मेन्यू: विदेशी मेहमानों को भारत के विविध जायकों से रूबरू कराया गया। मेन्यू में गुजराती खांडवी, मिलेट्स (मोटे अनाज) का पुलाव, पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और कश्मीर की खास मशरूम डिश शामिल थी।
जयपुर के चांदी के बर्तन: खास बात यह रही कि डिनर परोसने के लिए जयपुर से विशेष रूप से मंगाए गए सिल्वर प्लेटेड बर्तनों का इस्तेमाल किया गया। मीठे में मेहमानों को फ्रूट क्रीम के साथ जलेबी परोसी गई।
सांस्कृतिक छटा: भोजन के दौरान भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के 100 से अधिक कलाकारों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से समां बांध दिया।
जानकारों का मानना है कि 'डिनर डिप्लोमेसी' के जरिए बंद कमरों में न सुलझने वाले पेचीदा मुद्दों पर अनौपचारिक माहौल में आसानी से सहमति बन जाती है।
आतंकवाद पर आर-पार के मूड में ब्रिक्स
इस समिट में भारत ने अपनी कूटनीतिक ताकत का लोहा मनवाया है। मध्य पूर्व (ईरान, सऊदी अरब, यूएई) में जारी तनाव और मतभेदों के बावजूद भारत ने सभी सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने में कामयाबी हासिल की।
पहलगाम हमले की निंदा: रूस और चीन सहित सभी देशों ने 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 जानें गई थीं) की कड़ी निंदा की।
टेरर फंडिंग पर प्रहार: संयुक्त बयान में साफ किया गया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म या समुदाय से जोड़ना गलत है। इसके साथ ही, आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने वालों और उन्हें आर्थिक मदद (टेरर फंडिंग) पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त सामूहिक कार्रवाई पर मुहर लगी है।
UN में संधि की मांग: ब्रिक्स ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र की प्रस्तावित आतंकरोधी संधि को जल्द से जल्द लागू करने की पुरजोर वकालत की है।
वैश्विक मुद्दों पर ब्रिक्स का साझा घोषणापत्र
एकतरफा पाबंदियों का विरोध: सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों पर चिंता जताते हुए इन्हें विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ बताया।
परमाणु खतरा: बढ़ते वैश्विक तनाव और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकियों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई।
भारत की तारीफ: सभी देशों ने ब्रिक्स प्लस (BRICS Plus) और आउटरीच संवाद के सफल आयोजन के लिए भारत की अध्यक्षता की जमकर सराहना की।
मंच से पीएम मोदी ने दिए 5 बड़े प्रस्ताव
भविष्य की रूपरेखा तय करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के मंच से पांच महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
20 साल का नया विजन: ब्रिक्स के आगामी 20 वर्षों के लिए एक नया एजेंडा तैयार हो और फैसलों को लागू करने के लिए स्थायी तंत्र बने।
ग्लोबल साउथ की भागीदारी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष, साइबर स्पेस और बायोटेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों के नियम तय करने में विकासशील देशों को भी बराबर का हक मिले।
युवाओं को ट्रेनिंग: सदस्य देशों के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं के लिए संवाद और कानून के प्रशिक्षण की व्यवस्था हो।
नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क: समुद्र में मुसीबत में फंसे नाविकों के इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित रेस्क्यू के लिए देशों के बीच एक मजबूत नेटवर्क स्थापित किया जाए।
सबका भविष्य, सबका फैसला: पीएम ने स्पष्ट किया कि जब पूरी दुनिया का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा है, तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों को समान रूप से होना चाहिए।
7 साल बाद शी जिनपिंग का भारत दौरा
कूटनीतिक लिहाज से इस समिट की एक और बड़ी घटना चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत आगमन है। गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद पिछले 7 वर्षों में यह उनका पहला भारत दौरा है। ब्रिक्स कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद, आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच एक अहम द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।