राजस्थान में सिस्टम पर तीन सवाल: कहीं फ्रैक्चर नहीं दिखा, कहीं दरारें छिपीं तो कहीं सड़क के बीच खड़ा कर दिया पोल
राजस्थान में सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली तीन अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं।
राजस्थान में स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर तीन अलग-अलग घटनाओं ने सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं मरीज के फ्रैक्चर की पहचान नहीं हो सकी, कहीं करोड़ों की लागत से बने अस्पताल में दरारें सामने आईं, तो कहीं सड़क के बीच हाईमास्ट पोल लगाने का मामला चर्चा का विषय बन गया।
झुंझुनूं: फ्रैक्चर नहीं पहचान पाए डॉक्टर
झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल में एक मरीज को चोट लगने के बाद जांच के दौरान फ्रैक्चर नहीं बताया गया और उसे घर भेज दिया गया। बाद में निजी अस्पताल में जांच कराने पर पसली में फ्रैक्चर होने की जानकारी मिली। परिजनों ने जब सरकारी डॉक्टर से सवाल किया तो कथित तौर पर उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी। इस घटना के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।
दौसा: नए अस्पताल की बिल्डिंग में दरारें
दौसा जिले के लालसोट में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बने नए सरकारी अस्पताल की इमारत में दरारें आने का मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि दरारों को ठीक करने के बजाय उन पर एल्यूमिनियम की पट्टियां लगाकर ढक दिया गया। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ये दरारें ड्रेनेज पाइपलाइन से जुड़ी तकनीकी वजहों से आई हैं और भवन सुरक्षित है।