बांसवाड़ा में चमका सोने का तीसरा सूरज कांकरिया गांव की खान ने रचा इतिहास, राजस्थान बनेगा स्वर्ण साम्राज्य.

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के घाटोल क्षेत्र में कांकरिया गांव में तीसरी सोने की खान की पुष्टि हुई है। 3 किमी क्षेत्र में स्वर्ण अयस्क के विशाल भंडार मिले हैं, जो जिले को 'सोने का गढ़' बना रहे हैं। खनन शुरू होने से रोजगार और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। पहले भूकिया और जगपुरिया में भी सोने की खानें मिल चुकी हैं। बांसवाड़ा अब आदिवासी संस्कृति के साथ-साथ भारत के स्वर्ण खजाने के केंद्र के रूप में चमक रहा है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
October 25, 2025 • 4:59 PM  51
राजस्थान
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बांसवाड़ा में चमका सोने का तीसरा सूरज कांकरिया गांव की खान ने रचा इतिहास, राजस्थान बनेगा स्वर्ण साम्राज्य.
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बांसवाड़ा में चमका सोने का तीसरा सूरज कांकरिया गांव की खान ने रचा इतिहास, राजस्थान बनेगा स्वर्ण साम्राज्य.

बांसवाड़ा, 25 अक्टूबर 2025: राजस्थान के दक्षिणी छोर पर बसा आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिला, जो हमेशा से अपनी हरी-भरी वादियों, माही नदी की लहरों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है, अब एक नई ऊंचाई छू रहा है। यहां घाटोल तहसील के कांकरिया गांव में तीसरी सोने की खान के ब्लॉक की आधिकारिक पुष्टि ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के बाद मिले ठोस प्रमाणों से साबित हो गया है कि यह इलाका लगभग 3 किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में स्वर्ण अयस्क से लबालब भरा पड़ा है। यह खोज न केवल जिले की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली है, बल्कि बांसवाड़ा को 'सोने का गढ़' के रूप में अमिट पहचान दिला रही है।

खोज की पूरी कहानी: कैसे मिला सोने का यह अनमोल खजाना?

यह खबर अचानक नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और वैज्ञानिक खोज का नतीजा है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (जीएसआई) और राज्य खनिज विभाग के विशेषज्ञों ने घाटोल क्षेत्र में विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसमें ड्रिलिंग, सैंपल टेस्टिंग और जियोलॉजिकल मैपिंग शामिल थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांकरिया गांव के आसपास के 3 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले स्वर्ण अयस्क के संकेत मिले हैं। अनुमानित भंडार इतना विशाल है कि यह आने वाले दशकों तक खनन के लिए पर्याप्त रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रति टन अयस्क में सोने की मात्रा औसतन 2-3 ग्राम तक हो सकती है, जो व्यावसायिक खनन के लिए आदर्श है।यह तीसरी खान है जो बांसवाड़ा को सोने की दुनिया में मजबूत बनाएगी। याद रहे, इससे पहले घाटोल तहसील के ही जगपुरिया और भूकिया क्षेत्रों में दो प्रमुख सोने की खानों की पुष्टि हो चुकी है। जगपुरिया ब्लॉक में 1990-91 के सर्वेक्षण के दौरान ही सोने के संकेत मिले थे, जिसके बाद 69.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तीन ब्लॉकों में बांटा गया। भूकिया-जगपुरा इलाके में हाल ही में नीलामी प्रक्रिया पूरी हुई, जहां ऑस्ट्रेलियाई कंपनी मेटल्स माइनिंग ने बोली लगाई। इन खानों का कुल मूल्यांकन करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये का है, जो देश के छह प्रमुख स्वर्ण भंडारों में से 25 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान को देता है। कांकरिया की यह नई खोज इन दोनों को जोड़ते हुए एक संयुक्त स्वर्ण पट्टी का निर्माण कर रही है, जो बांसवाड़ा को भारत के प्रमुख माइनिंग हब में तब्दील कर देगी।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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