बाड़मेर में संविदाकर्मी द्वारा फर्जी MLC का मामला: वायरल वीडियो में घायलों का इलाज करते नजर आए संविदा कर्मचारी, कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच में कोई चोट नहीं
बाड़मेर के गरीब पीएचसी में संविदा कर्मचारी हठेसिंह ने खुद को डॉक्टर बताकर फर्जी MLC बनाई। वायरल वीडियो सामने आने और शिकायत के बावजूद 14 दिन बाद भी जांच नहीं हुई। कोर्ट के आदेश पर दोबारा MLC में कोई गंभीर चोट नहीं मिली। मामला दीपावली के दिन हुई मारपीट का है।
बाड़मेर, 20 नवंबर 2025: राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो वीडियोज में एक संविदा कर्मचारी (कॉन्ट्रैक्ट वर्कर) को घायल मरीजों की मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट (MLC) तैयार करते हुए साफ देखा जा सकता है। पीड़ित पक्ष ने इसकी शिकायत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को लिखित में दी है, लेकिन 14 दिनों बाद भी विभागीय जांच शुरू नहीं हुई। आखिरकार कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने MLC दोबारा करवाई, जिसमें पीड़ित को कोई गंभीर चोट नहीं पाई गई। यह घटना जिले के गरीब थाना इलाके की है, जहां दीपावली के दौरान दो पक्षों के बीच हुई झड़प के बाद यह विवाद उभरा।
घटना का पूरा विवरण: दीपावली पर हुई मारपीट और फर्जी रिपोर्ट मामला 20 अक्टूबर 2025 को दीपावली के दिन बाड़मेर जिले के गरीब थाना क्षेत्र के जीणे की बस्ती (तहसील गडरा रोड) का है। यहां दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी के बाद झगड़ा हो गया। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर मारपीट का आरोप लगाया। पीड़ित कचरा राम (पुत्र सगुड़ाराम, निवासी जीणे की बस्ती) ने अगले ही दिन यानी 21 अक्टूबर को गरीब थाना पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाई। पीड़ित ने बताया कि मारपीट के दौरान उसे चोटें आईं, जिसके बाद वह इलाज के लिए गरीब हॉस्पिटल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पहुंचा।लेकिन PHC में जो कुछ हुआ, वह बेहद शर्मनाक था। पीड़ित के अनुसार, वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नरेंद्र मीणा उपस्थित नहीं थे। उनकी जगह एक संविदा कर्मचारी हठेसिंह ने खुद को डॉक्टर बताते हुए इलाज शुरू कर दिया। हठेसिंह ने पीड़ित को कहा, "मेडिकल मेरी ओर से किया जाएगा।" फिर उसने एक कच्चे कागज पर हस्ताक्षरित मेडिकल रिपोर्ट तैयार की और पीड़ित को सौंप दी। इस रिपोर्ट में पीड़ित की चोटों को गंभीर बताकर MLC जारी किया गया, जो पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए आधार बनी। पीड़ित कचरा राम ने बताया, "मुझे लगा कि यह आधिकारिक रिपोर्ट है, लेकिन बाद में पता चला कि यह पूरी तरह फर्जी थी। डॉक्टर तो वहां थे ही नहीं।"
