नई कारों की लॉन्चिंग से यूज़्ड कार बाजार में गिरावट, पुरानी गाड़ियों की कीमतों पर दबाव
जून 2026 में भारत में नई कारों और फेसलिफ्ट मॉडल्स की लगातार लॉन्चिंग के कारण यूज़्ड कार बाजार में गिरावट देखी जा रही है। नई गाड़ियों के बढ़ते विकल्प और आकर्षक फीचर्स के चलते पुरानी कारों की मांग कम हुई है, जिससे उनकी रीसेल वैल्यू पर दबाव पड़ा है। खासकर हैचबैक और एंट्री-लेवल सेडान सेगमेंट में कीमतों में अधिक गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति खरीदारों के लिए फायदेमंद जबकि विक्रेताओं के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में जून 2026 के दौरान नई कारों और फेसलिफ्ट मॉडल्स की लगातार लॉन्चिंग का सीधा असर यूज़्ड कार (सेकेंड हैंड कार) बाजार पर देखने को मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोकप्रिय मॉडलों के नए संस्करण आने के बाद पुरानी गाड़ियों की मांग में कमी आई है, जिसके चलते उनकी रीसेल वैल्यू और बिक्री कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है।
ऑटो उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि ग्राहक अब नई तकनीक, बेहतर सुरक्षा फीचर्स और आकर्षक फाइनेंसिंग ऑफर्स के कारण नई कारों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में कई लोग अपनी पुरानी कारें बेचकर नए मॉडल खरीद रहे हैं, जिससे यूज़्ड कार बाजार में वाहनों की संख्या बढ़ गई है। सप्लाई बढ़ने और मांग अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
विशेष रूप से हैचबैक और एंट्री-लेवल सेडान सेगमेंट में कीमतों में अधिक गिरावट देखने को मिली है। वहीं, कुछ लोकप्रिय एसयूवी मॉडल्स की कीमतें भी पहले की तुलना में नरम हुई हैं। हालांकि अच्छी कंडीशन और कम माइलेज वाली गाड़ियों की मांग अब भी बनी हुई है, लेकिन खरीदारों के पास विकल्प बढ़ने से उन्हें बेहतर सौदे मिल रहे हैं।