राजस्थान FSL में DNA किट खरीद घोटाला: 8 करोड़ की गड़बड़ी से हिला सिस्टम, 4 अधिकारी हटाए गए

राजस्थान की FSL में DNA जांच किट्स की खरीद में करीब 8 करोड़ रुपये की अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि एक ही तरह की किट्स को अन्य राज्यों की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया, जिससे खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच में पाया गया कि कुछ DNA किट्स की कीमत राजस्थान में 3 से 11 गुना तक ज्यादा थी, जबकि हरियाणा जैसे राज्यों में वही उत्पाद काफी सस्ते दामों पर उपलब्ध था। शिकायत मिलने के बावजूद खरीद जारी रहने की बात भी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 4 अधिकारियों को एपीओ कर दिया है और नए डायरेक्टर की देखरेख में जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल जांच जारी है और यह स्पष्ट नहीं है कि यह मामला लापरवाही का है या बड़े स्तर की वित्तीय गड़बड़ी का।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Editor
April 15, 2026 • 5:33 PM  29
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राजस्थान FSL में DNA किट खरीद घोटाला: 8 करोड़ की गड़बड़ी से हिला सिस्टम, 4 अधिकारी हटाए गए
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15 Apr 2026
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राजस्थान FSL में DNA किट खरीद घोटाला: 8 करोड़ की गड़बड़ी से हिला सिस्टम, 4 अधिकारी हटाए गए

राजस्थान की विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) एक बड़े वित्तीय विवाद के केंद्र में आ गई है। DNA जैसी अत्यंत संवेदनशील जांच में इस्तेमाल होने वाली किट्स की खरीद में करीब 8 करोड़ रुपये तक की अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस मामले की परतें एक-एक कर खुल रही हैं और पूरी खरीद प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

यह मामला सिर्फ एक वित्तीय गड़बड़ी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की फॉरेंसिक व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

कैसे सामने आया पूरा मामला?

सूत्रों और जांच रिपोर्ट्स के अनुसार, FSL में DNA किट्स की खरीद के दौरान अलग-अलग दरों पर एक ही उत्पाद खरीदा गया। यही सबसे बड़ा विवाद का कारण बना।

आरोप है कि जिन किट्स का इस्तेमाल रेप, हत्या और अन्य गंभीर अपराधों की जांच में किया जाता है, उन्हें बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया।

जैसे-जैसे दस्तावेजों की जांच हुई, यह बात सामने आई कि कीमतों में असमानता सामान्य नहीं बल्कि बेहद चौंकाने वाली थी।

कीमतों में बड़ा अंतर: सबसे चौंकाने वाला पहलू

इस कथित घोटाले का सबसे बड़ा सबूत कीमतों में भारी अंतर बताया जा रहा है।

  • ऑटोसोमल STR DNA किट:
    राजस्थान में कीमत ~4 लाख रुपये से अधिक, जबकि हरियाणा में यही किट करीब 83 हजार रुपये में उपलब्ध
  • Y-क्रोमोसोमल STR किट:
    राजस्थान में लगभग 4.74 लाख रुपये, जबकि हरियाणा में करीब 1.25 लाख रुपये
  • STR एम्प्लीफिकेशन किट:
    राजस्थान में करीब 4.30 लाख रुपये, जबकि हरियाणा में सिर्फ 37,700 रुपये

इन आंकड़ों के आधार पर प्रति यूनिट 3 लाख से 4 लाख रुपये तक का अंतर सामने आया है। कुछ मामलों में कीमतें 10 से 11 गुना तक ज्यादा बताई जा रही हैं।

शिकायत के बावजूद नहीं थमी खरीद प्रक्रिया

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले को लेकर पहले ही अंदरूनी स्तर पर आपत्ति जताई जा चुकी थी।

बताया जा रहा है कि स्टोर प्रभारी डॉ. रमेश चौधरी ने 22 मई 2024 को ई-फाइल के जरिए सरकार को इस अनियमितता की जानकारी दी थी।

इसके बावजूद, वर्ष 2023-24 के दौरान महंगी दरों पर किट्स की खरीद जारी रही। यहां तक कि 25 जून 2024 को भी खरीद को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं।

8 करोड़ की गड़बड़ी का अनुमान कैसे?

प्रारंभिक आकलन के अनुसार, अलग-अलग यूनिट्स की कीमतों में भारी अंतर के चलते कुल मिलाकर करीब 8 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त लागत का अनुमान लगाया जा रहा है।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा, क्योंकि अभी सभी फाइलों और खरीद रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।

सरकार का सख्त एक्शन: 4 अधिकारी एपीओ

मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बड़ा कदम उठाया है।

  • तत्कालीन FSL डायरेक्टर डॉ. अजय शर्मा सहित 4 अधिकारी एपीओ किए गए
  • नए डायरेक्टर आरके मिश्रा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई
  • पूरी खरीद प्रक्रिया और दस्तावेजों की दोबारा जांच शुरू

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अगर जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो आगे और सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

नए डायरेक्टर का बयान

नए डायरेक्टर आरके मिश्रा ने कहा है कि उन्हें हाल ही में जिम्मेदारी मिली है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है।

उन्होंने साफ किया कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और सभी तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

क्यों बेहद गंभीर है यह मामला?

यह मामला सिर्फ पैसों की गड़बड़ी का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की नींव से जुड़ा हुआ है।

DNA किट्स का इस्तेमाल उन मामलों में होता है जहां:

  • रेप केस की जांच
  • हत्या के सबूतों की पुष्टि
  • गंभीर आपराधिक मामलों की फॉरेंसिक जांच

ऐसे में अगर खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर सीधे जांच की गुणवत्ता और न्याय प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि:

  • क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही थी?
  • या फिर किसी संगठित वित्तीय अनियमितता का मामला?
  • और क्या इसमें और बड़े नाम सामने आएंगे?

फिलहाल जांच जारी है, लेकिन एक बात तय है—
इस मामले ने राजस्थान की फॉरेंसिक सिस्टम और खरीद प्रक्रिया दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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