भारत की बड़ी सांस्कृतिक जीत - मराठा किलों को यूनेस्को विश्व धरोहर की मान्यता

भारत ने मराठा सैन्य परिदृश्य के 12 किलों को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करवाकर बड़ी सांस्कृतिक जीत हासिल की। पेरिस में तीखी बहस के बाद यह भारत का 44वां विश्व धरोहर स्थल बना।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 12, 2025 • 5:49 PM  69
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भारत की बड़ी सांस्कृतिक जीत - मराठा किलों को यूनेस्को विश्व धरोहर की मान्यता
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12 Jul 2025
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भारत की बड़ी सांस्कृतिक जीत - मराठा किलों को यूनेस्को विश्व धरोहर की मान्यता

भारत ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक और कूटनीतिक जीत हासिल की, जब “मराठा सैन्य परिदृश्य” को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह भारत का 44वां विश्व धरोहर स्थल बन गया है। पेरिस में आयोजित विश्व धरोहर समिति के सत्र में तीखी बहस के बाद यह फैसला लिया गया, जहां अंतरराष्ट्रीय स्मारक और स्थल परिषद (ICOMOS) की स्थगन की सिफारिश को खारिज करते हुए एक दर्जन से अधिक सदस्य देशों ने भारत के पक्ष में समर्थन दिया।

इस मान्यता ने 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच विकसित मराठा साम्राज्य के बारह ऐतिहासिक किलों के रक्षा नेटवर्क को सम्मानित किया, जो वर्तमान महाराष्ट्र और तमिलनाडु में फैले हुए हैं। सूची में शामिल किलों में महाराष्ट्र के साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खांदेरी किला, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग, साथ ही तमिलनाडु का जिंजी किला शामिल हैं। ये किले मराठों की सैन्य रणनीति और विविध भौगोलिक क्षेत्रों—तटीय द्वीपों से लेकर पहाड़ी चोटियों तक—में उनकी कुशल योजना को दर्शाते हैं।

कूटनीतिक जीत

पेरिस सत्र में ICOMOS ने नामांकन को स्थगित करने की जोरदार सिफारिश की थी। परिषद ने तर्क दिया कि बारह “प्रमुख किले” मराठा रक्षा प्रणाली का पूरी तरह प्रतिनिधित्व नहीं करते और “सांस्कृतिक परिदृश्य” श्रेणी के मानदंडों पर सवाल उठाए। इसके अलावा, बफर जोन में छोटे किलों के संरक्षण स्तर को लेकर भी चिंताएँ व्यक्त की गईं।

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