एक आंदोलन, कई विवाद! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक कैसे पहुंची लड़ाई? CJP पर लगे हर आरोप की पूरी कहानी
NEET पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ CJP का आंदोलन सिर्फ छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। विदेशी फंडिंग के आरोप, राजनीतिक नैरेटिव, CJI की 'कॉकरोच' टिप्पणी, जंतर-मंतर पर युवाओं का उबाल और आखिर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा—इस पूरे घटनाक्रम में कई ऐसे मोड़ आए जिन्होंने देशभर में बहस छेड़ दी। आखिर कौन-सा दावा सही था, किस पर उठे सवाल और क्या है पूरे विवाद की असली कहानी?
NEET के कथित पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे देश की सबसे बड़ी युवा आवाज बन गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह प्रदर्शन शुरुआती दिनों में केवल परीक्षा रद्द कराने और निष्पक्ष जांच की मांग तक सीमित था, लेकिन समय बीतने के साथ यह लाखों छात्रों और युवाओं के गुस्से का प्रतीक बन गया। आखिरकार लंबे प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया गया।
इस पूरे आंदोलन के दौरान कई तरह के दावे, आरोप और राजनीतिक बयान सामने आए। किसी ने इसे युवाओं की स्वतःस्फूर्त लड़ाई बताया तो किसी ने विदेशी फंडिंग और राजनीतिक समर्थन से प्रेरित आंदोलन करार दिया। सोशल मीडिया पर भी लगातार अलग-अलग नैरेटिव गढ़े गए, जिससे बहस और तेज होती गई।
जेन-जी की सबसे बड़ी भागीदारी बनी चर्चा का विषय