एक आंदोलन, कई विवाद! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक कैसे पहुंची लड़ाई? CJP पर लगे हर आरोप की पूरी कहानी

NEET पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ CJP का आंदोलन सिर्फ छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। विदेशी फंडिंग के आरोप, राजनीतिक नैरेटिव, CJI की 'कॉकरोच' टिप्पणी, जंतर-मंतर पर युवाओं का उबाल और आखिर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा—इस पूरे घटनाक्रम में कई ऐसे मोड़ आए जिन्होंने देशभर में बहस छेड़ दी। आखिर कौन-सा दावा सही था, किस पर उठे सवाल और क्या है पूरे विवाद की असली कहानी?

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 28, 2026 • 3:48 PM  5
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एक आंदोलन, कई विवाद! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक कैसे पहुंची लड़ाई? CJP पर लगे हर आरोप की पूरी कहानी
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एक आंदोलन, कई विवाद! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक कैसे पहुंची लड़ाई? CJP पर लगे हर आरोप की पूरी कहानी

NEET के कथित पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे देश की सबसे बड़ी युवा आवाज बन गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह प्रदर्शन शुरुआती दिनों में केवल परीक्षा रद्द कराने और निष्पक्ष जांच की मांग तक सीमित था, लेकिन समय बीतने के साथ यह लाखों छात्रों और युवाओं के गुस्से का प्रतीक बन गया। आखिरकार लंबे प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया गया।

इस पूरे आंदोलन के दौरान कई तरह के दावे, आरोप और राजनीतिक बयान सामने आए। किसी ने इसे युवाओं की स्वतःस्फूर्त लड़ाई बताया तो किसी ने विदेशी फंडिंग और राजनीतिक समर्थन से प्रेरित आंदोलन करार दिया। सोशल मीडिया पर भी लगातार अलग-अलग नैरेटिव गढ़े गए, जिससे बहस और तेज होती गई।

जेन-जी की सबसे बड़ी भागीदारी बनी चर्चा का विषय

इस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में जेन-जी के युवा शामिल हुए। जंतर-मंतर पर दिन-रात डटे छात्रों ने सरकार से जवाब मांगा और लगातार प्रदर्शन जारी रखा। कई विश्लेषकों ने इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा युवा आंदोलन बताया, जहां सोशल मीडिया और जमीनी प्रदर्शन दोनों साथ-साथ चलते दिखाई दिए।

विदेशी फंडिंग और राजनीति के आरोप

आंदोलन के दौरान CJP पर विदेशी फंडिंग, विपक्ष के समर्थन और राजनीतिक एजेंडे से जुड़े कई आरोप लगाए गए। हालांकि इन आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें दीं। समर्थकों का कहना था कि आंदोलन पूरी तरह छात्रों के हित में था, जबकि विरोधियों ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

CJI की टिप्पणी पर भी मचा विवाद

15 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की कथित 'कॉकरोच' और 'परजीवी' वाली टिप्पणी को लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया। अगले ही दिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया और उसका आशय वैसा नहीं था जैसा प्रचारित किया गया।

तीसरी बार झुकी सरकार?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह उन चुनिंदा मौकों में शामिल माना जा रहा है, जब बड़े जनदबाव के बाद सरकार को महत्वपूर्ण फैसला लेना पड़ा। इससे पहले CAA-NRC विरोध प्रदर्शन और किसान आंदोलन के बाद भी सरकार को अपने फैसलों में बदलाव करना पड़ा था। अब NEET आंदोलन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को भी उसी क्रम में देखा जा रहा है।

क्या बदला इस आंदोलन के बाद?

NEET विवाद से शुरू हुआ यह आंदोलन सिर्फ परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा। इसने युवाओं की राजनीतिक भागीदारी, सोशल मीडिया की ताकत और लोकतांत्रिक विरोध के नए स्वरूप को भी सामने रखा। साथ ही यह सवाल भी छोड़ गया कि क्या भविष्य में ऐसे आंदोलनों का असर सरकारी नीतियों और फैसलों पर और अधिक देखने को मिलेगा।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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