स्वतंत्रता दिवस विशेष: पति को लगी गोली तो साड़ी से बांधी पट्टी और तिरंगा लेकर आगे बढ़ गईं तारा रानी श्रीवास्तव
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की वो वीरांगना, जिसने पति की शहादत के बाद भी नहीं रुकने दिया तिरंगा मार्च; जानिए बिहार की इस जांबाज स्वतंत्रता सेनानी की अमर कहानी।
स्वतंत्रता दिवस विशेष: जब पति के जख्मों पर साड़ी की पट्टी बांधकर तिरंगा फहराने निकल पड़ीं तारा रानी
भारत के स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं का योगदान असाधारण और अविस्मरणीय रहा है। बिहार की धरती पर जन्मी वीरांगना तारा रानी श्रीवास्तव का साहस और राष्ट्रभक्ति इसका जीवंत उदाहरण है। जब उनके पति ब्रिटिश पुलिस की गोली लगने से लहुलुहान होकर गिर पड़े, तब भी उनके कदम नहीं डगमगाए और वे हाथ में तिरंगा थामे आगे बढ़ती रहीं।
प्रारंभिक जीवन और महिलाओं को एकजुट करना: तारा रानी श्रीवास्तव का जन्म बिहार के सारण जिले में हुआ था। उनका विवाह कम उम्र में ही फुलेंदु बाबू से हो गया था। दोनों ही स्वतंत्रता संग्राम के विचारों से ओत-प्रोत थे। तारा रानी ने अपने गांव और आसपास के इलाकों की महिलाओं को एकजुट किया और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।