70 बार कैमरे में कैद हुई चोरी... 8 गिरफ्तार! राम मंदिर दान घोटाले की SIT रिपोर्ट ने चौंकाया, जानें किन बड़े नामों पर हुआ फैसला
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में यूपी सरकार की SIT ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय का नाम नहीं है। 70 बार चोरी करते दिखे थे कर्मचारी। जानें सुप्रीम कोर्ट की नई SIT और मामले से जुड़ी पूरी जानकारी।
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
August 18, 2026 • 12:03 PM 2
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18 Aug 2026
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राम मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT (विशेष जांच दल) ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम शामिल नहीं है।
गृह विभाग ने आगे की कार्रवाई के लिए यह रिपोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंप दी है। अब इस रिपोर्ट पर ट्रस्ट की आगामी 2 सितंबर को होने वाली बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
प्रारंभिक जांच और CCTV फुटेज ने इस पूरी चोरी का पर्दाफाश किया था:
70 बार चोरी: 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की CCTV फुटेज खंगालने पर पता चला कि कर्मचारियों ने 70 बार नकदी छिपाकर ले जाने की कोशिश की।
नियमों की अनदेखी: जांच में यह बात सामने आई कि गिनती कक्ष में ट्रस्ट और SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) के प्रोटोकॉल का बिल्कुल पालन नहीं किया जा रहा था।
चेकिंग में लापरवाही: गिनती कक्ष में आने-जाने वाले कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी, जिसका फायदा उठाकर नोटों और गहनों की चोरी की गई।
8 आरोपी गिरफ्तार, चंपत राय का इस्तीफा
चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्टी कृष्ण मोहन ने 25 जून को FIR दर्ज कराई थी।
जेल में 8 आरोपी: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 कर्मचारियों— रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। वर्तमान में सभी आरोपी फैजाबाद जेल में बंद हैं।
नैतिक जिम्मेदारी और इस्तीफे: SIT की 23 जून को आई प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद, पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने इस्तीफे स्वीकार कर लिए और गोपाल नागरकट्टे को भी स्पेशल इनवाइटी की सूची से बाहर कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई नई SIT
भले ही यूपी सरकार की 3 सदस्यीय SIT (जिसकी अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे) ने अपनी रिपोर्ट दे दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच का एक नया दौर शुरू हो गया है।
20 जुलाई को नई SIT का गठन: सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि क्रिमिनल और चोरी के मामलों की तकनीकी जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका ज्यादा असरदार होती है।
नई टीम के सदस्य: नई SIT में आईजी लखनऊ रेंज किरण एस, डीआईजी अयोध्या सोमेन वर्मा और अयोध्या एसएसपी गौरव ग्रोवर को शामिल किया गया है। साथ ही एक फाइनेंस एक्सपर्ट को भी टीम का हिस्सा बनाया गया है।
सीधे सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट: पुरानी एसआईटी राज्य सरकार के स्तर पर रिपोर्ट कर रही थी, जबकि यह नई एसआईटी सीधे सुप्रीम कोर्ट में समय-समय पर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग
इस पूरे मामले की निगरानी खुद सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ी चार अलग-अलग याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में पूरे मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग की गई है। इसके अलावा, मंदिर में आने वाले दान के पारदर्शी प्रबंधन के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की भी अपील की गई है।