3 महीने में फैसला और जेल!'... मोदी कैबिनेट के इस गुप्त प्लान के पीछे क्या है सच्चाई?
नीट विवाद और जंतर-मंतर पर लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों के बीच मोदी कैबिनेट ने 'पेपर लीक संशोधन विधेयक' को हरी झंडी दिखा दी है। लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले नकल माफियाओं पर लगाम कसने के लिए सरकार 27 जुलाई को संसद में यह कड़ा बिल पेश करने जा रही है। इस नए कानून में दोषियों के लिए 10 साल की कड़ी जेल और ₹10 करोड़ के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, मामलों की तुरंत सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जो महज 3 महीने (90 दिन) के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाएंगी। पीएम मोदी ने भी भरोसा जताया है कि यह सख्त कदम छात्रों के सालों की मेहनत को बेकार होने से बचाएगा। हालांकि, असली सस्पेंस अब 27 जुलाई को संसद में देखने को मिलेगा कि क्या विपक्ष इस कड़े बिल को आसानी से पास होने देगा, या फिर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर संसद ठप हो जाएगी!
नीट विवाद और देशव्यापी विरोध के बीच मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। जानिए 10 करोड़ रुपये के जुर्माने, 10 साल की सजा और 3 महीने में फैसले वाले इस नए कड़े कानून को ।
लाखों युवाओं के सपनों पर पानी फेरने वाले और रातों-रात पेपर बेचकर रईस बनने वाले माफियाओं के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं!
जब-जब कोई बड़ा एग्जाम होता है, तब-तब एक ही खबर देश का दिल तोड़ देती है—"पेपर लीक हो गया!" लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने एक ऐसा फैसला ले लिया है, जिससे पेपर लीक माफियाओं की कमर पूरी तरह टूटने वाली है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे भारी विरोध और NEET स्कैम के गर्माए माहौल के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में 'पेपर लीक विधेयक संशोधन' (Paper Leak Amendment Bill) पर मुहर लगा दी गई है।