स्वतंत्रता दिवस विशेष: विदेशी कपड़ों के ट्रक के आगे लेट गए थे बाबू गेनू, 22 साल की उम्र में देश के लिए दी थी शहादत

स्वतंत्रता दिवस 2026 विशेष: जानिए मुंबई के मिल मजदूर हुतात्मा बाबू गेनू सैद की अमर शहादत की कहानी, जिन्होंने स्वदेशी आंदोलन के लिए विदेशी कपड़ों के ट्रक के आगे अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

kratika Jethwani
kratika Jethwani Sub Editor
August 14, 2026 • 4:45 PM | मुंबई  17
भारत
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स्वतंत्रता दिवस विशेष: स्वदेशी के लिए सीना तानने वाले हुतात्मा बाबू गेनू सैद

भारत की आजादी का इतिहास केवल बड़े नेताओं के भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन गुमनाम और आम वीरों के लहू से भी लिखा गया है जिन्होंने देश के लिए हंसते-हंसते अपनी जान न्योछावर कर दी। ऐसे ही एक वीर क्रांतिकारी थे हुतात्मा बाबू गेनू सैद, जिन्होंने महज 22 वर्ष की उम्र में स्वदेशी आंदोलन के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया था।

किसान परिवार में जन्म और मुंबई की मिल में मजदूरी: बाबू गेनू सैद का जन्म 1 जनवरी 1908 को महाराष्ट्र के पुणे जिले के आंबेगांव तालुका स्थित महालुंगे पड़वल गांव के एक बेहद गरीब किसान परिवार में हुआ था। आजीविका की तलाश में वे मुंबई आ गए और यहां एक कॉटन (सूती) मिल में मजदूर के रूप में काम करने लगे।

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