स्वतंत्रता दिवस विशेष: अंग्रेजों के खजाने लूटकर गरीबों में बांटने वाले 'इंडियन रॉबिनहुड' टंट्या मामा, जिनके सम्मान में आज भी रुकती है ट्रेन
स्वतंत्रता दिवस विशेष: जानिए भारत के 'रॉबिनहुड' जननायक टंट्या भील (टंट्या मामा) की अमर कहानी, जिन्होंने 12 वर्षों तक ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष किया।
स्वतंत्रता दिवस विशेष: ब्रिटिश हुकूमत को घुटनों पर लाने वाले जननायक 'टंट्या मामा'
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जब भी आदिवासी विद्रोह और अदम्य साहस की बात आती है, जननायक टंट्या भील (जिन्हें लोग प्यार से 'टंट्या मामा' कहते हैं) का नाम सबसे आगे आता है। अंग्रेजी हुकूमत के लिए वे एक चुनौती थे, जबकि भारतीय जनमानस के लिए वे गरीबों के मसीहा और 'इंडियन रॉबिनहुड' थे।
जन्म और प्रारंभिक जीवन: टंट्या भील का जन्म 25 जनवरी 1840 को तत्कालीन नागपुर साम्राज्य के निमाड़ जिले (वर्तमान मध्य प्रदेश) के पंधाना गांव में एक आदिवासी भील परिवार में हुआ था। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों द्वारा आदिवासियों और आम जनता पर किए जा रहे जुल्मों ने उनके मन में बगावत की चिंगारी सुलगा दी।