जेएनयू में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर विवादास्पद नारेबाजी

5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि पांच अन्य आरोपियों को जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि खालिद और इमाम की भूमिका साजिश में केंद्रीय थी। इसके विरोध में जेएनयू में छात्रों ने प्रदर्शन किया, जहां पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादास्पद नारे लगे, जैसे "मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर"। प्रदर्शन का वीडियो वायरल हो गया, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भाजपा ने इसे भारत विरोधी बताया।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
January 6, 2026 • 11:54 AM  25
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जेएनयू में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर विवादास्पद नारेबाजी
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6 Jan 2026
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जेएनयू में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर विवादास्पद नारेबाजी

दिल्ली (6 जनवरी 2026):- सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया सबूतों से दोनों की भूमिका साजिश में केंद्रीय और निर्णायक लगती है। वे योजना बनाने, भीड़ जुटाने और रणनीति तय करने में शामिल थे।

अन्य आरोपियों को राहत:

इसी मामले में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को शर्तों के साथ जमानत मिली। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खालिद और इमाम की भूमिका अन्य से अलग और गंभीर है।

जमानत दोबारा आवेदन:

दोनों आरोपी संरक्षित गवाहों की जांच पूरी होने या एक साल बाद नई जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं।  सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जेएनयू कैंपस में वामपंथी छात्र संगठनों (एसएफआई, डीएसएफ आदि) से जुड़े 30-40 छात्रों ने सबरमती हॉस्टल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान "मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर" जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए।

वीडियो वायरल: प्रदर्शन का 35 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ गया।  यह प्रदर्शन 5 जनवरी 2020 की जेएनयू हिंसा की छठी बरसी से भी जुड़ा था, जब नकाबपोश हमलावरों ने कैंपस में छात्रों-शिक्षकों पर हमला किया था। जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इसे शांतिपूर्ण और वैचारिक बताया, किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:

भाजपा और एबीवीपी ने नारों की कड़ी निंदा की, इसे "टुकड़े-टुकड़े गैंग" और "अर्बन नक्सल्स" की भारत विरोधी सोच बताया। दिल्ली पुलिस ने वीडियो के आधार पर जांच के संकेत दिए। कुछ विपक्षी नेताओं ने जमानत खारिज को अन्य मामलों से तुलना कर सवाल उठाए।  प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, कोई हिंसा या तोड़फोड़ नहीं हुई। जेएनयू प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई और स्थिति पर नजर रखी।

यह घटना जेएनयू की राजनीतिक सक्रियता को फिर चर्चा में ला रही है, जहां छात्र राष्ट्रीय मुद्दों पर अक्सर विरोध जताते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन नफरत भड़काने वाले नारे कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकते हैं।

 

Basanti Parmar

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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