"जोजरी" एक नदी जो रो भी नहीं सकती... फिर भी पुकार रही है – बचाओ मुझे!

राजस्थान की जोजरी नदी आज देश की सबसे प्रदूषित नदियों में शुमार हो चुकी है। जोधपुर-पाली-बालोतरा के औद्योगिक क्षेत्रों की सैकड़ों टेक्सटाइल व अन्य फैक्ट्रियाँ बिना ट्रीटमेंट का जहरीला पानी सीधे नदी में डाल रही हैं। इससे 50+ गाँवों की हजारों एकड़ जमीन बंजर, भू-जल दूषित, पशु-पक्षी मर रहे हैं और लोगों में कैंसर-श्वास जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। 2025 में थान सिंह डोली और हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन हुआ, सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, 100-176 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का ऐलान हुआ, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस काम नहीं हुआ। नदी का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और ग्रामीण न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
December 5, 2025 • 1:31 PM  7
राजस्थान
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5 Dec 2025
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"जोजरी" एक नदी जो रो भी नहीं सकती... फिर भी पुकार रही है – बचाओ मुझे!

जोधपुर/बालोतरा, 5 दिसंबर 2025: राजस्थान की थार मरुस्थल के बीचों-बीच बहने वाली जोजरी नदी, जो कभी ग्रामीणों की जीवन रेखा थी, आज एक जहरीले दलदल में तब्दील हो चुकी है। नागौर जिले के पंडलू गांव से निकलकर जोधपुर को पार करती हुई बालोतरा के पास लूणी नदी में मिलने वाली यह मौसमी नदी अब औद्योगिक कचरे और रासायनिक जल की भेंट चढ़ गई है। जोधपुर, पाली और बालोतरा के औद्योगिक क्षेत्रों से बिना किसी उपचार के छोड़े जाने वाले अपशिष्ट जल ने न केवल नदी को काला कर दिया है, बल्कि इसके किनारे बसे 50 से अधिक गांवों—जैसे डोली, अराबा, कल्याणपुर, मैलबा और धवा—की हजारों एकड़ कृषि भूमि को बंजर बना दिया है। अनुमान है कि इससे 20 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं, जहां पशु-पक्षी मर रहे हैं, भूजल दूषित हो रहा है और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव न के बराबर नजर आ रहा है।

प्रदूषण का काला अध्याय: फैक्ट्रियों का जहर, किसानों का सफाया

जोजरी नदी का प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है। पिछले दो दशकों से जोधपुर के बोरानाडा, सालावास और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की 400 से अधिक स्टील, टेक्सटाइल और अन्य फैक्ट्रियां अपना अपशिष्ट जल—जिसमें भारी धातुएं जैसे सीसा, क्रोमियम, कैडमियम और नाइट्रेट की घातक मात्रा होती है—बिना ट्रीटमेंट के नदी में उड़ेल रही हैं। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) के अनुसार, जोधपुर में प्रतिदिन 230 मिलियन लीटर से अधिक घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें से 180 मिलियन लीटर डिस्चार्ज जोजरी में ही होता है। नतीजा? नदी का पानी काला पड़ गया है, तेजाबी गंध से हवा जहरीली हो गई है और नदी किनारे खड़े होने पर सिरदर्द और उल्टी जैसी परेशानियां आम हो गई हैं।ग्रामीणों की जिंदगी इस जहर की भेंट चढ़ रही है। डोली गांव के किसान श्रवण पटेल बताते हैं, "हमारे खेतों में जोजरी का पानी पहुंचते ही फसलें मुरझा जाती हैं।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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