राजस्थान की मिट्टी में बसी है शिक्षा की अलख ,शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री ने की शिक्षकों की भूमिका की सराहना
शिक्षक दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता बताते हुए शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान की प्रगति और डिजिटलीकरण के प्रयासों की सराहना की। उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने भी शिक्षकों के योगदान को सराहा और राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शिक्षकों को राष्ट्र का भविष्य गढ़ने वाला बताया। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा, "राजस्थान की मिट्टी में शिक्षा की अलख जगाने की खुशबू है। यह वही भूमि है, जहां महाराणा प्रताप, मीरा बाई और पन्ना धाय जैसे महान व्यक्तित्वों ने जन्म लिया।" उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक न केवल ज्ञान का प्रसार करते हैं, बल्कि चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। "गुरु अपने शिष्य को स्वयं से बड़ा देखना चाहता है, तभी सपने साकार होते हैं," सीएम ने भावुक अंदाज में कहा।
शिक्षा के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़े कदम
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के शिक्षा क्षेत्र में किए गए क्रांतिकारी कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा के डिजिटलीकरण और गुणवत्ता सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। "हमारी सरकार शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने और इसे आधुनिक बनाने के लिए कटिबद्ध है। शिक्षक इस बदलाव के सबसे बड़े सिपाही हैं," उन्होंने कहा। समारोह में शिक्षकों को सम्मानित करते हुए उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति का आधार बताया और कहा कि यह परंपरा वर्षों से ज्ञान का प्रकाश फैलाती रही है।
शिक्षक दिवस: सम्मान और प्रेरणा का उत्सव
सीएम ने शिक्षक दिवस को केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गुरुओं के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, "गुरु केवल शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक होता है। गुरु को गुरु ने ही बनाया, यह हमारी परंपरा की खूबसूरती है।" इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों से समाज और राष्ट्र निर्माण में और अधिक योगदान देने का आह्वान किया।