93 की उम्र में दौड़ीं, 103 तक जीतीं, और अमर हो गईं!
93 की उम्र में दौड़ शुरू कर 103 तक विश्व रिकॉर्ड जीतने वाली मान कौर की कहानी हर किसी को हैरान और प्रेरित करती है। 105 साल की उम्र में दुनिया छोड़ने वाली यह "चमत्कारी दादी" हमेशा याद रहेगी।
93 की उम्र में दौड़ शुरू कर 103 तक विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली मान कौर की कहानी हर दिल को छूती है। चंडीगढ़ की इस "चमत्कारी दादी" ने 105 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी प्रेरणा आज भी जिंदा है।
एक साधारण शुरुआत, असाधारण कहानी
कल्पना करें, 93 साल की उम्र, जब ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, तब मान कौर ने ट्रैक पर दौड़ना शुरू किया। 1 मार्च 1916 को पंजाब के पटियाला में जन्मीं मान कौर की जिंदगी आसान नहीं थी। जन्म के एक महीने बाद माँ को खो दिया, पिता की आर्थिक तंगी में पलीं, और दादी के प्यार में बड़ी हुईं। कम उम्र में शादी के बाद 1960 में वह अपने पति के साथ चंडीगढ़ चली गईं। उनके पास कोई जन्म प्रमाण पत्र नहीं था, लेकिन उनके बेटे गुरदेव सिंह का 81 साल पुराना जन्म प्रमाण पत्र बताता है कि वह उस वक्त 20 की थीं। सिर्फ पंजाबी बोलने वाली, 5 फीट की यह छोटी-सी महिला एक दिन दुनिया को हैरान करने वाली थी।
बेटे ने जगाया जुनून
मान कौर की जिंदगी में खेल का रंग उनके बेटे गुरदेव सिंह ने भरा, जो खुद एक मास्टर्स एथलीट थे। 2007 में, 93 साल की उम्र में, गुरदेव ने उन्हें चंडीगढ़ मास्टर्स एथलेटिक्स मीट में हिस्सा लेने के लिए मनाया। मान कौर ने हँसते हुए इसे "मजाक" समझा, लेकिन जब उन्होंने पहला स्वर्ण पदक जीता, तो वह रुकने का नाम ही नहीं लिया। उनकी कहानी यहीं से शुरू हुई, और वह विश्व रिकॉर्ड की राह पर दौड़ पड़ीं।