राजस्थान के बाड़मेर जिले में गोबर गैस प्लांट की सफलता: 50 से ज्यादा घरों में गैस सिलेंडर की जरूरत नहीं, चूल्हे जल रहे हैं बायोगैस से
राजस्थान के बाड़मेर जिले में 50 से अधिक घरों में गोबर गैस प्लांट लगे हैं, जहां किसान गाय-भैंस के गोबर से बायोगैस बनाकर रसोई चला रहे हैं। गैस सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती, सब्सिडी पर प्लांट लगे (जैसे हरिराम भाखर ने 40 हजार सब्सिडी पर 15-17 हजार में लगाया)। निकलने वाली स्लरी जैविक खाद के रूप में खेती में उपयोग हो रही है, जिससे रासायनिक उर्वरक कम हो रहे हैं। यह पर्यावरण-अनुकूल, सस्ता और आत्मनिर्भरता बढ़ाने वाला विकल्प है, खासकर पशुपालन वाले क्षेत्रों में।
बाड़मेर जिला, जो राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में स्थित है और जहां पशुपालन किसानों की मुख्य आजीविका है, वहां एक अनोखी क्रांति देखने को मिल रही है। जिले के कई गांवों में गोबर गैस प्लांट (बायोगैस प्लांट) लगाए गए हैं, जिनकी संख्या 50 से अधिक है। इन प्लांटों के जरिए ग्रामीण परिवार न केवल रसोई में खाना पका रहे हैं, बल्कि गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और उपलब्धता की समस्या से भी मुक्त हो गए हैं। यह पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
हरिराम भाखर की प्रेरक कहानी
जानपालिया गांव (सेड़वा क्षेत्र) के निवासी प्रगतिशील किसान हरिराम भाखर इस बदलाव के सबसे अच्छे उदाहरण हैं। करीब 4 साल पहले उन्होंने गोबर गैस प्लांट लगवाया। एक एनजीओ की मदद से उन्हें 40 हजार रुपये की सब्सिडी मिली, जिसके बाद कुल खर्च लगभग 15-17 हजार रुपये आया। अब उनके घर में पिछले चार साल से सभी सदस्यों का खाना इसी बायोगैस से बनता है।