सुनील नामक व्यक्ति अपनी पत्नी को तबीयत खराब होने पर भीलवाड़ा के सरकारी महात्मा गांधी हॉस्पिटल ले गए थे। डॉक्टरों ने जांच के बाद पत्नी को उच्च इलाज के लिए उदयपुर रेफर कर दिया। इसके बाद सुनील ने हॉस्पिटल परिसर में खड़ी प्राइवेट एंबुलेंस से संपर्क किया।
दो ड्राइवर आनंद और दीपक वहां मौजूद थे। उन्होंने उदयपुर ले जाने के लिए 4 हजार रुपये किराया मांगा। सुनील को यह राशि ज्यादा लगी, इसलिए उन्होंने अपने परिचित से फोन पर बात की। परिचित ने उदयपुर तक ले जाने के लिए 3 हजार रुपये में एंबुलेंस देने की बात कही।सुनील ने इसी बात को उन ड्राइवरों को बताया और कहा कि या तो वे भी 3 हजार में चलें, या फिर वह दूसरी एंबुलेंस से जाएंगे। इस पर ड्राइवर दीपक भड़क गया। उसने सुनील को किराया कम करने से इनकार कर दिया और दूसरे ड्राइवर को भी जाने से मना कर दिया।
मारपीट और अभद्र व्यवहार
विवाद बढ़ने पर ड्राइवर दीपक ने सुनील के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद उसने सुनील को उसके पत्नी के सामने ही जमकर थप्पड़ मारे और मारपीट की। सुनील की पत्नी बार-बार बीच में आकर अपने पति को बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन ड्राइवर नहीं माना।इस दौरान दूसरे ड्राइवर आनंद ने भी सुनील को गालियां दीं और कहा- "तेरा मरीज रास्ते में ही मर जाएगा"। यह बात सुनकर सुनील और उनकी पत्नी सदमे में आ गए।घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ड्राइवर द्वारा थप्पड़ मारने और गाली देने के दृश्य साफ दिख रहे हैं।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
पीड़ित सुनील ने बताया कि वे किराए को लेकर सिर्फ बात कर रहे थे, लेकिन ड्राइवर ने इसे व्यक्तिगत हमला समझ लिया और हिंसक हो गए। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे।
अस्पताल प्रशासन का रुख
महात्मा गांधी हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ. अरुण कुमार गौड़ ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा:"अस्पताल परिसर में इस तरह की मारपीट और अभद्र व्यवहार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम इसकी पूरी जांच कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। साथ ही, अस्पताल परिसर में अनधिकृत रूप से खड़े रहने वाले प्राइवेट एंबुलेंस ड्राइवरों पर भी सख्ती बरती जाएगी।"
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्राइवेट एंबुलेंस ड्राइवर दीपक को थाने ले गई। मामले की जांच चल रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।यह घटना न केवल मरीज परिवार के साथ अन्याय है, बल्कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसे व्यवहार से पूरे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। मरीज की जान बचाने की बजाय किराए के चक्कर में ऐसे व्यवहार बेहद निंदनीय हैं।