जिस किसान के बिना एक निवाला भी मुमकिन नहीं, उसी अन्नदाता की अहमियत भूलता जा रहा डिजिटल दौर!

आधुनिक और डिजिटल दौर में लोग तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इसी भागदौड़ में किसान और उसकी मेहनत की अहमियत को भूलते जा रहे हैं। किसान अपनी मेहनत से देश का पेट भरता है और हमारी हर थाली के पीछे उसका संघर्ष छिपा होता है। यह खबर अन्नदाता के सम्मान और उसकी भूमिका को याद दिलाती है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
June 17, 2026 • 3:17 PM  2
भारत
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जिस किसान के बिना एक निवाला भी मुमकिन नहीं, उसी अन्नदाता की अहमियत भूलता जा रहा डिजिटल दौर!
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17 Jun 2026
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जिस किसान के बिना एक निवाला भी मुमकिन नहीं, उसी अन्नदाता की अहमियत भूलता जा रहा डिजिटल दौर!

आज की यह खबर किसी राजनीतिक मुद्दे से जुड़ी नहीं है और न ही किसी विवाद से। यह उस सच्चाई से जुड़ी है, जिसे आधुनिक दौर में हम कहीं पीछे छोड़ते जा रहे हैं। बदलते समय के साथ इंसान ने बहुत तरक्की की है। तकनीक, डिजिटल दुनिया और सुविधाओं ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसी तेज रफ्तार जिंदगी में कई ऐसी चीजें हैं जिनकी अहमियत धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

आज हर कोई कम समय में ज्यादा पाने की दौड़ में है। खाने-पीने से लेकर जीवन के हर क्षेत्र में लोग सुविधा और शॉर्टकट को प्राथमिकता देने लगे हैं। लेकिन इस बदलाव के बीच हमें उस इंसान को नहीं भूलना चाहिए, जिसके परिश्रम से हमारी थाली भरती है—किसान।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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