'अब बॉस को खुश करने के लिए एक्स्ट्रा काम नहीं!' Gen Z ने बदली कॉर्पोरेट की हवा, 86% मैनेजर्स भी नौकरी छोड़ने को तैयार

ग्रेट प्लेस टू वर्क (Great Place to Work) की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी खोज रहा है। वर्कफोर्स में Gen Z की बढ़ती हिस्सेदारी और AI के दौर में कंपनियों के लिए कर्मचारियों को रोक कर रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
August 25, 2026 • 8:04 PM  3
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'अब बॉस को खुश करने के लिए एक्स्ट्रा काम नहीं!' Gen Z ने बदली कॉर्पोरेट की हवा, 86% मैनेजर्स भी नौकरी छोड़ने को तैयार
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'अब बॉस को खुश करने के लिए एक्स्ट्रा काम नहीं!' Gen Z ने बदली कॉर्पोरेट की हवा, 86% मैनेजर्स भी नौकरी छोड़ने को तैयार

भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर और प्रोफेशनल सर्विसेज में काम करने वाले कर्मचारियों की मानसिकता में तेजी से बदलाव आ रहा है। कर्मचारियों को अपनी कंपनी से लंबे समय तक जोड़े रखना (Employee Retention) अब नियोक्ताओं के लिए पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। 'ग्रेट प्लेस टू वर्क' (Great Place to Work) की हालिया रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जो बताते हैं कि भारत में हर 2 में से 1 कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश में है। वहीं, 75 फीसदी कर्मचारी अगले 12 महीनों के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी को अलविदा कहने की योजना बना रहे हैं।

यह सर्वे 130 से ज्यादा संगठनों के 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों के बीच किया गया है। रिपोर्ट इस बात की ओर भी इशारा करती है कि केवल अच्छी सैलरी या ऑफिस की शानदार सुविधाएं अब कर्मचारियों को रोकने के लिए काफी नहीं हैं।

वर्कफोर्स में Gen Z का दबदबा: 2 साल में दोगुनी हुई हिस्सेदारी

रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू वर्कफोर्स में 'जेनरेशन जेड' (Gen Z - 1997 के बाद जन्मे युवा) की बढ़ती भागीदारी है। प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में पिछले दो सालों में Gen Z की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत (2023) से बढ़कर सीधे 34 प्रतिशत हो गई है।

इन युवा कर्मचारियों की प्राथमिकताएं पुरानी पीढ़ी से बिल्कुल अलग हैं:

  • स्पष्टता की मांग: यह पीढ़ी वेतन, प्रमोशन, करियर ग्रोथ और पहचान को लेकर पूरी पारदर्शिता चाहती है।

  • वर्क-लाइफ बैलेंस: अब कर्मचारी सिर्फ बॉस को खुश करने या नौकरी बचाने के लिए अपने तय काम से बाहर जाकर अतिरिक्त जिम्मेदारियां उठाने के मूड में नहीं हैं। वे अपनी निजी जिंदगी और काम के बीच संतुलन को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।

'शॉक एब्जॉर्बर' बने मैनेजर, सबसे ज्यादा छोड़ना चाहते हैं नौकरी

आमतौर पर माना जाता है कि फ्रेशर्स या जूनियर कर्मचारी जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं, लेकिन रिपोर्ट एक अलग ही तस्वीर पेश करती है।

  • 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश में हैं।

  • व्यक्तिगत योगदान देने वाले (Individual Contributors) कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मैनेजर इन दिनों 'शॉक एब्जॉर्बर' की तरह काम कर रहे हैं। क्लाइंट की भारी मांग, कड़े डेडलाइन, टीम की अंदरूनी समस्याएं और ऊपरी मैनेजमेंट के दबाव को एक साथ संभालने के कारण इन पर काम का तनाव सबसे अधिक है।

AI का बढ़ता इस्तेमाल, लेकिन ट्रेनिंग में फिसड्डी कंपनियां

आजकल लगभग 60 प्रतिशत संगठन अपने रोजमर्रा के काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि केवल 20 प्रतिशत कर्मचारियों को ही यह लगता है कि उन्हें AI टूल्स के फायदों और जोखिमों के बारे में पर्याप्त जानकारी या ट्रेनिंग दी गई है। स्पष्ट है कि कंपनियां तकनीक तो अपना रही हैं, लेकिन अपने कर्मचारियों को इसके लिए तैयार करने में काफी पीछे हैं।

क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

'ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया' के प्रबंध निदेशक अक्षत शाह के मुताबिक, कंपनियों को अब 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' (सबके लिए एक नियम) वाली नीति बदलनी होगी। अलग-अलग पीढ़ियों की अपेक्षाएं अलग हैं और कंपनियों को अपनी रिटेंशन रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा।

आज के दौर में नौकरी छोड़ने की वजह सिर्फ कम सैलरी नहीं है। कर्मचारी यह देख रहे हैं कि उन्हें सम्मान कितना मिल रहा है, सीखने के कितने अवसर हैं और कंपनी के विजन में उनके भविष्य की क्या जगह है। आने वाले समय में वही कंपनियां बाजार में टिकेंगी, जो सिर्फ भर्तियां करने के बजाय अपने कर्मचारियों को समझने और उनका विकास करने पर फोकस करेंगी

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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