इस विरोध की जड़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर उपजा विवाद है। भाजपा महिला मोर्चा का आरोप है कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इस अहम बिल को आगे बढ़ने से रोककर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मुद्दा केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी के सम्मान और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
प्रदर्शन में शामिल अनीता देवड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित न होने देना विपक्ष की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने इसे पूरे देश की महिलाओं का अपमान बताते हुए कहा कि इसका असर आने वाले चुनावों में जरूर देखने को मिलेगा। उन्होंने पौराणिक संदर्भ देते हुए चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि महिलाओं के अपमान का परिणाम हमेशा गंभीर होता है।
वहीं, श्वेता सिंह ने इस घटनाक्रम को “भारत के इतिहास का काला दिन” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकना चाहता है और यह कदम उसी दिशा में एक उदाहरण है। उनके मुताबिक, देश की महिलाएं अब इस तरह के फैसलों को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगी और लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगी।
पूर्व भाजपा विधायक मोहन राम ने भी इस मौके पर अपनी बात रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक पहल है, जो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है। उन्होंने बताया कि इस कानून को लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया आवश्यक है और सरकार 2029 से इसे प्रभावी करने की दिशा में काम कर रही है।
मोहन राम ने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल पिछले 30 से अधिक वर्षों से लंबित था और हर बार कुछ दलों के रुख के कारण इसमें देरी होती रही। उनका कहना था कि कुछ राजनीतिक दल नहीं चाहते कि महिलाओं को नेतृत्व में समान भागीदारी मिले, इसलिए लगातार बाधाएं उत्पन्न की जाती रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने नागौर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में महिला आरक्षण के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। सड़कों पर उतरे इस विरोध ने यह साफ कर दिया है कि यह विषय अब सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम लोगों के बीच भी गहराई से जुड़ चुका है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या यह विरोध आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा? क्या इस मुद्दे पर सियासत और तेज होगी? फिलहाल, नागौर की सड़कों पर जो तस्वीर सामने आई है, वह आने वाले समय में बड़े राजनीतिक असर की ओर इशारा जरूर कर रही है।