खान विभाग में 1550 करोड़ का घोटाला, कैग (CAG) रिपोर्ट में अवैध खनन और राजस्व लूट का बड़ा खुलासा

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र में पेश CAG रिपोर्ट में खान विभाग में 1550 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान और 23.83 लाख टन अवैध खनन का सनसनीखेज खुलासा हुआ है

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026 Sub Editor
August 24, 2026 • 5:52 PM  2
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खान विभाग में 1550 करोड़ का घोटाला, कैग (CAG) रिपोर्ट में अवैध खनन और राजस्व लूट का बड़ा खुलासा
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खान विभाग में 1550 करोड़ का घोटाला, कैग (CAG) रिपोर्ट में अवैध खनन और राजस्व लूट का बड़ा खुलासा

राजस्थान में खनिज संपदा की लूट और सरकारी राजस्व को लगे बड़े चूने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने खान विभाग (Mining Department) की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। कैग की पड़ताल में सामने आया है कि विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और भारी अनियमितताओं के कारण राज्य सरकार के खजाने को 1,550.79 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ है।

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद से ही प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल दागे हैं।

कैग (CAG) रिपोर्ट की मुख्य बातें (Key Highlights):

नियमों को ताक पर रखकर हुआ 23.83 लाख टन अवैध खनन

कैग की जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 44 खनन पट्टों (Mining Leases) से करीब 23.83 लाख मीट्रिक टन खनिज अवैध रूप से निकाला गया। यानी, नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं और विभाग इस भारी मात्रा में निकाले गए खनिज की लागत और राजस्व वसूलने में पूरी तरह नाकाम रहा। इसके अलावा, निर्धारित स्वीकृत मात्रा से अधिक लगभग 3.73 लाख मीट्रिक टन खनिज का अनाधिकृत उत्पादन भी किया गया, जिसके लिए 10 पट्टाधारकों से 19.41 करोड़ रुपए का जुर्माना और 52.63 करोड़ रुपए की खनिज लागत तक नहीं वसूली गई।

बिना योजना के खोदा गया 8.01 लाख टन खनिज

विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांच खनिज अभियंताओं के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 15 पट्टाधारकों ने बिना किसी स्वीकृत खनन योजना के ही 8.01 लाख मीट्रिक टन खनिज निकाल लिया। विभाग ने इस मामले में 33.22 करोड़ रुपए की मांग तो निकाली, लेकिन यह जमीनी निगरानी तंत्र पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है।

192.72 करोड़ की वसूली अटकी, अधिकारी रहे मौन

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 10 खनिज अभियंताओं ने अवैध खनन की जानकारी होने के बावजूद समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नतीजतन, सरकार के 192.72 करोड़ रुपए की वसूली अटक गई।

वहीं, वित्तीय वर्ष 2023-24 के आंकड़ों पर गौर करें तो खान विभाग ने 8,005 मामलों में 1,386.55 करोड़ रुपए की कम वसूली की बात स्वीकारी है। हैरानी की बात यह है कि पिछले वर्षों की आपत्तियों से जुड़े 1,382.79 करोड़ रुपए के पुराने मामलों में से विभाग केवल 2.92 करोड़ रुपए ही वसूल पाया है।

कांग्रेस का तीखा हमला: "सरकार ने जानबूझकर छोटा रखा मानसून सत्र"

इस बड़े खुलासे के बाद कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधानसभा में कांग्रेस के उप मुख्य सचेतक रफीक खान ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कैग रिपोर्ट ने सरकार की पूरी पोल खोल दी है।

उन्होंने आरोप लगाया, "ये वही लोग हैं जो अरावली पर्वत शृंखला में अवैध खनन को बढ़ावा दे रहे थे। खनिज संपदा की किस तरह लूट हुई है, वह सदन के पटल पर आ चुका है। सरकार सदन में सवालों से बचना चाहती थी, इसीलिए जानबूझकर मानसून सत्र को छोटा चलाया गया। लेकिन अब जनता के सामने सच्चाई आ चुकी है।"

कैग रिपोर्ट के बाद खड़े होते 3 सबसे बड़े सवाल:

इस पूरे प्रकरण ने सिर्फ राजस्व वसूली ही नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं:

  1. जिम्मेदारी किसकी? 1,550.79 करोड़ रुपए की इतनी बड़ी कम वसूली और राजस्व नुकसान के लिए आखिर किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी?

  2. कार्रवाई में देरी क्यों? अवैध खनन और नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की जानकारी होने के बावजूद विभागीय स्तर पर कार्रवाई करने में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई?

  3. वसूली कब होगी? करोड़ों रुपए की जो सरकारी देनदारी है, उसे समय पर क्यों नहीं वसूला गया और अब इस लंबित राशि को वसूलने का क्या रोडमैप है?

हजारों मामलों में सामने आई ये खामियां साफ दर्शाती हैं कि उत्पादन के सत्यापन, खनन पट्टों की निगरानी और सरकारी देनदारियों की वसूली का तंत्र पूरी तरह से फेल हो चुका है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इन आपत्तियों का निस्तारण कैसे करती है।

yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026 Sub Editor

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