नो समोसा, नो बर्गर! राजस्थान के स्कूलों में जंक फूड पर हाईकोर्ट की ‘रेड लाइट’

राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों की कैंटीन और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड (HFSS) की बिक्री पर बैन लगा दिया है।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
August 24, 2026 • 10:34 PM  91
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राजस्थान
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नो समोसा, नो बर्गर! राजस्थान के स्कूलों में जंक फूड पर हाईकोर्ट की ‘रेड लाइट’
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नो समोसा, नो बर्गर! राजस्थान के स्कूलों में जंक फूड पर हाईकोर्ट की ‘रेड लाइट’

बच्चों में बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (Lifestyle Diseases) को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। कोर्ट ने राज्य भर के सभी स्कूलों की कैंटीन और स्कूल गेट के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

जस्टिस अनूप कुमार ढंढ की सिंगल बेंच ने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर संज्ञान लेते हुए यह सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने बच्चों के बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम और शिक्षा के गिरते मूल स्तर पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है।

इन खाद्य पदार्थों पर रहेगी सख्त पाबंदी

हाईकोर्ट के आदेशानुसार, स्कूलों और उसके 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, शुगर और सॉल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थ नहीं बेचे जा सकेंगे। प्रतिबंध के दायरे में मुख्य रूप से ये चीजें शामिल हैं:

  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स (कोल्ड ड्रिंक्स)

  • पैकेटबंद चिप्स और नमकीन

  • ट्रांस-फैट वाले बेकरी प्रोडक्ट्स

  • अन्य सभी प्रकार के जंक फूड

नियमों की अनदेखी पर कोर्ट की फटकार

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि साल 2020 में ही 'सुरक्षित और संतुलित भोजन' को लेकर नियम बनाए गए थे, लेकिन 6 साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी इनका प्रभावी रूप से पालन नहीं किया गया। अब नियमों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारियों (DM) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) को हर महीने स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्कूलों के लिए कोर्ट की नई गाइडलाइंस (डेडलाइन)

कोर्ट ने सभी स्कूलों और प्रशासन को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने के लिए समय सीमा भी तय की है:

  • 4 सप्ताह का समय: सभी स्कूलों को अपने यहाँ 'स्कूल खाद्य सुरक्षा और पोषण समिति' का गठन करना होगा।

  • 8 सप्ताह का समय: स्कूल कैंटीन में एक मेन्यू बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा, जिसमें खाद्य पदार्थों की कैलोरी, सामग्री और पोषण (Nutrition) संबंधी पूरी जानकारी लिखी हो।

  • मिड-डे मील: सरकारी स्कूलों में चलने वाली मिड-डे मील और अन्य पोषण योजनाओं में भी संतुलित आहार के मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।

तकनीक जरूरी, लेकिन मूल शिक्षा का विकल्प नहीं

आजकल स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक के बढ़ते चलन पर कोर्ट ने कहा कि शिक्षा में इनका इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन यह बच्चों की मूल सीखने की क्षमता को खत्म नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों में बुनियादी आदतें जैसे- हाथ से लिखना, किताबें पढ़ना, खुद नोट्स बनाना और लिखित परीक्षा देने जैसी गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दें।

ग्रामीण स्कूलों की सूरत बदलने के निर्देश

हाईकोर्ट ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि ग्रामीण सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को जल्द भरा जाए। इसके अलावा, स्कूलों में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, इंटरनेट, स्वास्थ्य जांच, स्वच्छ शौचालय, पीने का पानी और खेल कूद की सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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