संविदा/अस्थायी कर्मचारियों को बड़ी राहत: 40 साल की सेवा को राजस्थान हाईकोर्ट ने नियमित माना, पेंशन सहित रिटायरमेंट लाभ मिलेंगे
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने 40 साल तक अस्थायी/संविदा पर काम करने वाले 11 पूर्व ऑक्ट्रॉय कर्मचारियों को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने उनकी सेवा को मूल नियुक्ति तिथि से नियमित मानते हुए पेंशन सहित सभी रिटायरमेंट लाभ देने का आदेश दिया, हालांकि पुराना एरियर नहीं मिलेगा
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसले में उन कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है जो दशकों तक अस्थायी/संविदा आधार पर काम करते रहे, लेकिन कभी नियमित नहीं किए गए। कोर्ट ने साफ कहा है कि 40 साल तक लगातार दी गई सेवा को महज “अस्थायी” कहकर कर्मचारी को नियमितीकरण और पेंशन जैसे मूल अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस रेखा बोराणा की एकल पीठ ने भीलवाड़ा निवासी सत्यनारायण शर्मा और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश 2025 में जारी किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से ही चतुर्थ श्रेणी का नियमित कर्मचारी मानते हुए पेंशन और सभी रिटायरमेंट लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
मामला क्या था? मुख्य याचिकाकर्ता सत्यनारायण शर्मा को 5 अगस्त 1981 को पंचायत समिति लूणकरणसर (बीकानेर) में गेट कीपर के पद पर अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया था। 1992 में इन्हें चुंगी नाका रक्षक बनाया गया। राजस्थान में 1990 के दशक में ऑक्ट्रॉय (चुंगी) पूरी तरह खत्म हो जाने के कारण ये कर्मचारी “सरप्लस” (अधिशेष) हो गए थे। लेकिन 6 अगस्त 1998 को राज्य सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी किया था कि ऑक्ट्रॉय से जुड़े कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जाएगी। इसके बाद सत्यनारायण शर्मा ने 14 अगस्त 1981 से लगातार ग्राम पंचायत लूणकरणसर में सेवा दी। यानी करीब 40-42 साल तक बिना ब्रेक के काम किया।
सरकार ने नियमित क्यों नहीं किया? जिला परिषद बीकानेर ने 23 नवंबर 2007 को अधिशेष कर्मचारियों को अन्य जगह समायोजित करने के लिए लिस्ट भेजी थी।ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने 27 नवंबर 2016 को आदेश दिया कि ऐसे कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी का न्यूनतम वेतनमान दिया जाए।लेकिन सत्यनारायण शर्मा सहित कई कर्मचारियों के नाम इस लिस्ट में शामिल ही नहीं किए गए।रिटायरमेंट के बाद जब इन्होंने पेंशन और अन्य लाभ मांगे तो सरकार ने इंकार कर दिया।