राजस्थान में नई कार खरीदने पर मिलने वाले सरकारी डिस्काउंट के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि एक कार डीलर ने 53 ग्राहकों के नाम पर फर्जी स्क्रैप सर्टिफिकेट (COD – Certificate of Deposit) तैयार करवाकर सरकारी छूट का लाभ खुद हड़प लिया।
यह पूरा मामला स्क्रैप पॉलिसी से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत पुरानी गाड़ी स्क्रैप कराने पर नई कार खरीदने पर 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। आरोप है कि इस पॉलिसी का दुरुपयोग करते हुए ग्राहकों की जानकारी के बिना उनके नाम पर सर्टिफिकेट तैयार कर लिए गए।
जांच में सामने आया है कि जोधपुर स्थित श्रीकृष्णा ऑटो सेल्स शोरूम ने यह पूरा खेल किया। भास्कर की पड़ताल में 53 ऐसे स्क्रैप सर्टिफिकेट सामने आए, जो अलग-अलग ग्राहकों के नाम पर बनाए गए थे, लेकिन इनमें से कई ग्राहकों को इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी।
ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने नई कार पूरी कीमत पर खरीदी, लेकिन उन्हें किसी तरह का कोई स्क्रैप डिस्काउंट नहीं दिया गया। बाद में जब उनसे संपर्क किया गया, तो उन्हें अपने नाम पर बने सर्टिफिकेट की जानकारी मिली, जिससे वे खुद हैरान रह गए।
ग्राहकों ने खोला पूरा राज
कई ग्राहकों ने पुष्टि की है कि उन्होंने न तो कोई पुरानी गाड़ी स्क्रैप में दी थी और न ही किसी तरह का COD सर्टिफिकेट लिया था। इसके बावजूद उनके नाम पर सर्टिफिकेट बनाकर डिस्काउंट का पैसा कथित तौर पर शोरूम द्वारा हड़प लिया गया।
कुछ मामलों में तो ग्राहकों के दस्तावेज जैसे आधार, पैन और बैंक डिटेल का भी इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
मैनेजर से डील का खुलासा
पड़ताल के दौरान स्क्रैप डीलर कंपनी के मैनेजर से बातचीत में यह भी सामने आया कि फर्जी सर्टिफिकेट 25 हजार से 45 हजार रुपये तक में बेचे जा रहे थे। कंपनी प्रतिनिधि ने दावा किया कि हर महीने सैकड़ों सर्टिफिकेट डीलरों को उपलब्ध कराए जाते हैं।
यह भी सामने आया कि स्क्रैप सर्टिफिकेट पहले से स्क्रैप हो चुकी गाड़ियों के दस्तावेज और चेसिस नंबर के आधार पर तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें नए ग्राहकों के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाता है।
स्क्रैप पॉलिसी कैसे बनी स्कैम पॉलिसी
सरकार की स्क्रैप पॉलिसी का उद्देश्य पुरानी और अनफिट गाड़ियों को हटाकर प्रदूषण कम करना है। इसके तहत वाहन स्क्रैप कराने पर रोड टैक्स में छूट और अन्य लाभ दिए जाते हैं।
लेकिन इस मामले में आरोप है कि डीलर और स्क्रैप कंपनियों की मिलीभगत से बिना वास्तविक स्क्रैप के ही सर्टिफिकेट तैयार कर सरकारी छूट का फायदा उठाया गया।
जांच में जुटा परिवहन विभाग
जोधपुर के जिला परिवहन अधिकारी ने कहा है कि यदि किसी ग्राहक की अनुमति के बिना स्क्रैप सर्टिफिकेट बनाकर छूट ली गई है तो मामले की जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
वहीं परिवहन विभाग ने इस तरह के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए नई निगरानी समिति बनाने की बात कही है।
ग्राहकों में आक्रोश
इस खुलासे के बाद ग्राहकों में भारी नाराजगी है। कई लोगों का कहना है कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर आर्थिक धोखाधड़ी की गई है। कुछ ग्राहक अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
फिलहाल यह मामला राज्य में ऑटोमोबाइल सेक्टर के बड़े फर्जीवाड़ों में से एक माना जा रहा है, जिसकी जांच आगे जारी है।