राजस्थान में फर्जी डिग्री पर लगेगी लगाम: विश्वविद्यालयों के सभी प्रमाण-पत्रों पर अनिवार्य होगा QR कोड

राजस्थान सरकार ने फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों की डिग्री, डिप्लोमा, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर QR कोड अनिवार्य होगा। QR स्कैन करने से दस्तावेज की असलियत तुरंत विश्वविद्यालय के डेटाबेस से वेरिफाई हो जाएगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी आएगी।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
December 25, 2025 • 12:42 PM  24
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राजस्थान में फर्जी डिग्री पर लगेगी लगाम: विश्वविद्यालयों के सभी प्रमाण-पत्रों पर अनिवार्य होगा QR कोड
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राजस्थान में फर्जी डिग्री पर लगेगी लगाम: विश्वविद्यालयों के सभी प्रमाण-पत्रों पर अनिवार्य होगा QR कोड

राजस्थान राज्य सरकार ने नौकरी भर्ती प्रक्रियाओं में फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के बढ़ते उपयोग को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम उठाया है। अब राज्य की सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों द्वारा जारी की जाने वाली डिग्री, डिप्लोमा, मार्कशीट तथा माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर QR कोड अनिवार्य रूप से अंकित किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच मात्र एक क्लिक में हो सकेगी, जिससे फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगेगी और भर्ती प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी तथा तेज होंगी।

समस्या की जड़ और सरकार का सुझाव भर्ती प्रक्रियाओं, खासकर सरकारी नौकरियों में, अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी या बैकडेटेड डिग्री, मार्कशीट पेश करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन संदिग्ध दस्तावेजों की जांच में काफी समय लगता है, जिससे भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है और योग्य उम्मीदवारों को नुकसान होता है।इस समस्या के समाधान के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने 21 अगस्त को राज्य सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। RPSC ने विश्वविद्यालयों द्वारा जारी दस्तावेजों में डिजिटल सुरक्षा फीचर्स जैसे QR कोड जोड़ने की सिफारिश की। इसके बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:तकनीकी शिक्षा विभाग ने 3 सितंबर को,उच्च शिक्षा विभाग ने 26 सितंबर को,राज्य की सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए। अब सभी विश्वविद्यालयों को इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

नई व्यवस्था कैसे काम करेगी? यह नई प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित होगी। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:डिजिटल वेरिफिकेशन के माध्यम से त्वरित जांच:डिग्री, मार्कशीट या अन्य प्रमाण-पत्र पर छपे QR कोड को स्कैन करने मात्र से अभ्यर्थी का पूरा अकादमिक रिकॉर्ड संबंधित विश्वविद्यालय के आधिकारिक डेटाबेस से सीधे मिलान हो जाएगा।भर्ती करने वाली संस्था (जैसे RPSC या अन्य विभाग) को मूल रिकॉर्ड की जांच के लिए विश्वविद्यालय से पत्राचार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सबकुछ ऑनलाइन और तुरंत हो जाएगा।स्टैंडर्ड एनरोलमेंट सिस्टम:सभी विश्वविद्यालयों को एक मानकीकृत नामांकन (एनरोलमेंट) व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।अब हर छात्र को वर्षवार और क्रमवार एनरोलमेंट नंबर आवंटित किया जाएगा। इससे रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की हेराफेरी या बैकडेट एंट्री असंभव हो जाएगी।व्यापक लागू होना:यह नियम केवल अंतिम डिग्री तक सीमित नहीं है। प्रोविजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य सभी शैक्षिक प्रमाण-पत्रों पर भी QR कोड अनिवार्य होगा।इससे छात्रों के पूरे अकादमिक जीवन के दस्तावेज सुरक्षित और सत्यापित रहेंगे।

RPSC सचिव का बयान: पारदर्शिता और तेजी आएगी RPSC के सचिव रामनिवास मेहता ने इस नई व्यवस्था पर कहा, "भर्ती परीक्षाओं के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान कुछ अभ्यर्थी बैकडेट में फर्जी डिग्री पेश करने जैसे आपराधिक कृत्य करते पाए गए हैं। QR कोड आधारित नई व्यवस्था से न केवल भर्ती में पारदर्शिता आएगी, बल्कि दस्तावेजों की प्रमाणिकता डिजिटली सत्यापित होने से पूरी प्रक्रिया में तेजी भी आएगी। फर्जीवाड़ा करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई आसान हो जाएगी।"

इस कदम के फायदे फर्जीवाड़े पर रोक: गिरोहों द्वारा बनाई जाने वाली नकली डिग्रियां अब आसानी से पकड़ी जा सकेंगी।समय की बचत: भर्ती संस्थानों को जांच में लगने वाला लंबा समय बचेगा।पारदर्शिता: योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिलेगा और भर्ती प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम: यह राजस्थान सरकार का डिजिटल सुरक्षा की ओर एक मजबूत पहल है।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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