CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद पर सियासत तेज, जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा

CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने साइबर सुरक्षा, टेंडर प्रक्रिया और COEMPT कंपनी को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। वहीं CBSE ने सभी आरोपों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 1, 2026 • 3:24 PM  7
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CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद पर सियासत तेज, जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा
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CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद पर सियासत तेज, जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित साइबर सुरक्षा खामियों और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि CBSE ने आखिरकार यह स्वीकार कर लिया है कि उसकी ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में सुरक्षा संबंधी समस्याएं थीं।

क्या है पूरा मामला?

CBSE ने बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की थी। इस प्रणाली के जरिए परीक्षकों द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं का ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाता है। हाल ही में इस सिस्टम की साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।

कांग्रेस का आरोप है कि इस व्यवस्था में गंभीर तकनीकी और सुरक्षा खामियां थीं, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी और लाखों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता था।

जयराम रमेश ने लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि CBSE लंबे समय तक OSM प्रणाली में किसी भी तरह की साइबर सुरक्षा कमजोरी से इनकार करता रहा, लेकिन अब बोर्ड ने खुद स्वीकार किया है कि सिस्टम से समझौता हुआ था।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सिस्टम में खामियां थीं तो इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने इस परियोजना से जुड़ी कंपनी COEMPT की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।

COEMPT को बचाने का आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय और CBSE में कुछ लोग COEMPT कंपनी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगस्त 2025 में जारी Request for Proposal (RFP) में CBSE के पास खराब प्रदर्शन करने वाले विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार था।

लेकिन बाद में जारी किए गए शुद्धिपत्र के जरिए इस अधिकार को वापस ले लिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम विशेष रूप से COEMPT को लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया।

शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग

जयराम रमेश ने इस पूरे मामले को लाखों छात्रों के हितों से जुड़ा बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय की निगरानी में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि इन कथित गड़बड़ियों की वजह से छात्रों और उनके परिवारों की मानसिक शांति प्रभावित हुई है। कांग्रेस नेता ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की सलाह दी।

छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता

कांग्रेस का कहना है कि बोर्ड परीक्षाएं देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। ऐसे में मूल्यांकन प्रणाली में किसी भी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा खामी बेहद गंभीर विषय है। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।

CBSE ने आरोपों को किया खारिज

वहीं CBSE ने कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। बोर्ड ने 27 मई को जारी अपने बयान में कहा था कि COEMPT Edutech को कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित नियमों के तहत की गई है।

CBSE का कहना है कि केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर 28 अगस्त 2025 को डिजिटल मूल्यांकन के लिए निविदा जारी की गई थी और सभी वित्तीय एवं तकनीकी मानकों का पालन करते हुए योग्य बोलीदाता को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया।

साइबर सुरक्षा पर विशेष निगरानी

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि OnMark पोर्टल की सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संभावित कमजोरियों की पहचान और समाधान के लिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भी तैनात की गई है।

CBSE के अनुसार छात्रों के डेटा और मूल्यांकन प्रक्रिया की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

राजनीतिक विवाद के बीच बढ़ी चर्चा

CBSE OSM विवाद अब शिक्षा व्यवस्था से निकलकर राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। एक ओर कांग्रेस सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर CBSE सभी आरोपों को निराधार बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक तथा प्रशासनिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

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