200 साल पुरानी जोधपुरी मोजरी को मिला GI टैग, अब दुनिया में बढ़ेगी पहचान कारोबार दोगुना होने की उम्मीद..

करीब 200 साल पुरानी जोधपुरी मोजरी को GI (Geographical Indication) टैग मिल गया है। इससे इस पारंपरिक हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। जीआई टैग से नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, कारीगरों को लाभ होगा और वर्तमान 100 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार अगले दो वर्षों में दोगुना होने की उम्मीद जताई जा रही है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 10, 2026 • 3:07 PM | Jodhpur  1
राजस्थान
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200 साल पुरानी जोधपुरी मोजरी को मिला GI टैग, अब दुनिया में बढ़ेगी पहचान कारोबार दोगुना होने की उम्मीद..
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10 Jul 2026
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200 साल पुरानी जोधपुरी मोजरी को मिला GI टैग, अब दुनिया में बढ़ेगी पहचान कारोबार दोगुना होने की उम्मीद..

जोधपुर। राजस्थान की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को बड़ी पहचान मिली है। करीब दो शताब्दियों से अपनी खास डिजाइन, मजबूत कारीगरी और शाही अंदाज के लिए मशहूर जोधपुरी मोजरी को अब भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि न केवल जोधपुर के कारीगरों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस पारंपरिक उत्पाद की अलग पहचान भी मजबूत होगी।

जीआई टैग मिलने के बाद अब जोधपुरी मोजरी को उसकी मौलिक पहचान के साथ वैश्विक स्तर पर प्रचार मिलेगा। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और असली जोधपुरी मोजरी की मांग बढ़ने की संभावना है।

हजारों कारीगरों को मिलेगा सीधा लाभ

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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