राजस्थान के गांवों में श्मशानों तक पहुंचने के लिए बनेंगे रास्ते, जमीन होगी आरक्षित; कलेक्टरों को सरकार के निर्देश

राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान भूमि से जुड़े विवादों को खत्म करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब श्मशानों की जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, उनका सीमांकन होगा, अतिक्रमण हटाया जाएगा और श्मशानों तक पहुंचने के लिए रास्ते विकसित किए जाएंगे। राजस्व विभाग ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 10, 2026 • 2:30 PM  3
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राजस्थान के गांवों में श्मशानों तक पहुंचने के लिए बनेंगे रास्ते, जमीन होगी आरक्षित; कलेक्टरों को सरकार के निर्देश
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राजस्थान के गांवों में श्मशानों तक पहुंचने के लिए बनेंगे रास्ते, जमीन होगी आरक्षित; कलेक्टरों को सरकार के निर्देश

राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों के समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब गांवों में श्मशानों की जमीन का राजस्व रिकॉर्ड में विधिवत दर्ज किया जाएगा और वहां तक पहुंचने के लिए रास्तों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए राजस्व विभाग ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।

दरअसल, प्रदेश के कई गांवों में वर्षों से श्मशान तो संचालित हैं, लेकिन उनकी जमीन राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में दर्ज नहीं होने के कारण समय-समय पर अतिक्रमण, भूमि विवाद और अंतिम संस्कार के दौरान सामाजिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। सरकार ने इन समस्याओं को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की है।

ग्रामीण सेवा शिविरों में होगा रिकॉर्ड सुधार

राजस्व विभाग के निर्देशों के अनुसार, प्रदेशभर में आयोजित किए जा रहे ग्रामीण सेवा शिविरों के दौरान श्मशान भूमि का रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाएगा। जिन श्मशानों की जमीन सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं है, उनका सर्वे कर जमाबंदी में नाम दर्ज किया जाएगा। साथ ही भूमि का सीमांकन कर उसे कानूनी रूप से सुरक्षित किया जाएगा।

श्मशानों तक पहुंचने के लिए खुलेंगे रास्ते

सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन गांवों में श्मशानों तक पहुंचने का रास्ता नहीं है या रास्ते पर अतिक्रमण है, वहां रास्ते खुलवाए जाएं। इन रास्तों को राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। रास्तों को विकसित कर पंचायतों के सुपुर्द किया जाएगा, जिससे उनका रखरखाव भी नियमित रूप से हो सके।

अतिक्रमण हटाने और सीमांकन के निर्देश

कलेक्टरों को श्मशान भूमि का भौतिक सत्यापन कराने, सीमांकन करवाने और यदि कहीं अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाने के निर्देश दिए गए हैं। भूमि की नाप-जोख के बाद उसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, जिससे श्मशान भूमि की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

नए श्मशानों के लिए भी होगी जमीन आरक्षित

राजस्व विभाग ने यह भी कहा है कि जिन गांवों में श्मशान के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है या आवश्यकता महसूस की जाती है, वहां नई जमीन आरक्षित कर श्मशान के लिए आवंटित की जाएगी। भविष्य में भी जरूरत के अनुसार यह प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।

विवादों पर लगेगी रोक

ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार श्मशान तक रास्ता नहीं होने या भूमि के स्वामित्व को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य भी प्रभावित होते हैं। सरकार का मानना है कि श्मशान भूमि का रिकॉर्ड दुरुस्त करने, रास्तों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने और अतिक्रमण हटाने से ऐसे विवादों पर प्रभावी रोक लग सकेगी और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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