मनिहारी प्रकरण, रविंद्र सिंह भाटी और प्रशासन में बनी सहमति,शामिल अधिकारियों पर जांच का आश्वाशन,धरना समाप्त
बाड़मेर के मणिहारी गांव में सोलर हब के नाम पर ग्रामीणों की जमीन पर बिना उचित मुआवजा दिए हाईटेंशन लाइन के पोल लगाने का विवाद गहराया। ग्रामीणों के विरोध और एक मां-बच्ची की हिरासत के बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने शिव थाने के बाहर धरना दिया। भाटी और SHO मनीष देव के बीच नोकझोंक हुई। 8 घंटे की वार्ता के बाद प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। यह घटना सौर ऊर्जा परियोजनाओं के नाम पर जमीन हड़पने और प्रशासन-कंपनी गठजोड़ के खिलाफ जनता के संघर्ष को दर्शाती है।
राजस्थान के बाड़मेर जिले के मणिहारी गांव में हाईटेंशन बिजली टावरों को लेकर उपजा विवाद एक बड़े जनांदोलन का रूप ले चुका था, जिसने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। इस प्रकरण में शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनकी आवाज बुलंद की। यह घटना 17 मई 2025 को तब शुरू हुई, जब मणिहारी गांव में हाईटेंशन तारों और टावरों की स्थापना को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया। उनका आरोप था कि निजी कंपनियां और प्रशासन आपसी सांठगांठ करके उनकी जमीन पर जबरन निर्माण कर रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
विवाद तब और गहरा गया, जब पुलिस ने विरोध कर रहे ग्रामीणों पर बल प्रयोग किया और एक महिला सहित कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई ने ग्रामीणों में आक्रोश की आग भड़का दी। खबर फैलते ही रविंद्र सिंह भाटी, जो अपनी जनहितैषी छवि और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, तुरंत मणिहारी पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ शिव थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। भाटी ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह जनविरोधी है और निजी कंपनियों के हितों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों का दमन किया जा रहा है। उनकी मांग थी कि हिरासत में लिए गए ग्रामीणों को तुरंत रिहा किया जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
धरना शुरू होने के बाद माहौल और गर्म हो गया। भाटी के समर्थक और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में थाने के बाहर जुटने लगे। भाटी के समर्थकों ने इसे अन्याय के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक बताया, जबकि कुछ लोगों ने उनकी इस सक्रियता को सियासी रंग देने की कोशिश की। इस बीच, प्रशासन पर दबाव बढ़ता गया। भाटी ने रविवार को थाने का बड़े पैमाने पर घेराव करने का ऐलान कर दिया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।