एनजीटी मेंबर ने बाड़मेर में पर्यावरणीय मुद्दों पर जोर दिया: जिला पर्यावरण योजना में तेजी लाने, खेजड़ी पेड़ बचाने और खनन प्रदूषण पर सख्ती की जरूरत

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने बाड़मेर दौरा कर जिला पर्यावरण योजना पर तत्काल और व्यापक काम करने की जरूरत बताई। खेजड़ी पेड़ के पर्यावरणीय महत्व पर जोर देते हुए इसके संरक्षण की अपील की और कहा कि विकास व पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने JSW व वेदांता की खनन गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण, गंदे पानी से कृषि भूमि बंजर होने और लूणी नदी प्रदूषण के मुद्दे उठाए। ग्रीन बेल्ट, खनन क्लोजर प्लान और जन जागरूकता पर सख्ती की सलाह दी गई।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
December 27, 2025 • 11:24 AM  12
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एनजीटी मेंबर ने बाड़मेर में पर्यावरणीय मुद्दों पर जोर दिया: जिला पर्यावरण योजना में तेजी लाने, खेजड़ी पेड़ बचाने और खनन प्रदूषण पर सख्ती की जरूरत
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27 Dec 2025
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एनजीटी मेंबर ने बाड़मेर में पर्यावरणीय मुद्दों पर जोर दिया: जिला पर्यावरण योजना में तेजी लाने, खेजड़ी पेड़ बचाने और खनन प्रदूषण पर सख्ती की जरूरत

बाड़मेर (राजस्थान): राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने हाल ही में बाड़मेर जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट के कॉन्फ्रेंस हॉल में अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पूर्व सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने एनजीटी सदस्य के साथ अलग से मुलाकात कर खनन कंपनियों से जुड़े पर्यावरणीय प्रदूषण के गंभीर मामलों को उठाया।

खनन कंपनियों से प्रदूषण की शिकायतें उम्मेदाराम बेनीवाल ने वेदांता कंपनी के क्रूड ऑयल खनन और जेएसडब्ल्यू (JSW) कंपनी के लिग्नाइट कोयला खनन के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को भूमि में दबाने से होने वाली पर्यावरणीय क्षति की ओर ध्यान आकर्षित कराया। विशेष रूप से JSW की कोयला खनन प्रक्रिया में डी-वॉटरिंग से निकलने वाला गंदा पानी किसानों के खेतों में छोड़े जाने से कृषि भूमि बंजर हो रही है। इससे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है। सांसद ने इस प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाने और दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।इसके अलावा, जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट जल के कारण लूणी नदी के प्रदूषित होने का मुद्दा भी उठाया गया। यह नदी क्षेत्र की जल संपदा और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रदूषण से इसका अस्तित्व खतरे में है।एनजीटी सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने सांसद बेनीवाल की इन शिकायतों की सराहना की और कहा कि इन मुद्दों को राज्य सरकार के सामने उठाया जाएगा ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके।

जिला पर्यावरण योजना पर जोर एनजीटी सदस्य ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि बाड़मेर जिला प्रशासन को डिस्ट्रिक्ट एनवायरनमेंट प्लान (DEP) पर बहुत अधिक काम करने की आवश्यकता है। एनजीटी के आदेशानुसार हर जिले में यह योजना अनिवार्य है, जिसमें ठोस कचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट), तरल कचरा (लिक्विड वेस्ट), सीवरेज ट्रीटमेंट, खनन संबंधी मुद्दे, नदियां-झीलें और शहरी वातावरण की कार्ययोजना शामिल होती है।बाड़मेर में यह योजना तैयार तो है, लेकिन इसका क्रियान्वयन अभी पाइपलाइन में है। अधिकारीगण से चर्चा में पता चला कि प्रगति सीमित है। सदस्य ने जोर दिया कि सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। योजना को लागू करने के लिए अप्रूवल और बजट की व्यवस्था कर धरातल पर उतारना जरूरी है। प्रशासन और पुलिस को जन जागरूकता अभियान चलाने की सलाह दी गई।

खेजड़ी पेड़ का विशेष महत्व खेजड़ी (Prosopis cineraria) राजस्थान का राज्य वृक्ष है और थार रेगिस्तान के पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण। एनजीटी सदस्य ने कहा कि खेजड़ी का पर्यावरणीय महत्व बहुत अधिक है – यह मिट्टी को बांधे रखता है, जल संरक्षण में मदद करता है और जैव विविधता को बढ़ावा देता है। खेजड़ी कटाई के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इसकी रक्षा जरूरी है। जहां विकास के लिए बाधा आए, वहां न्यूनतम कटाई करें और एक पेड़ की जगह दस पेड़ लगाएं।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। अगर पर्यावरण को प्राथमिकता दी जाए तो विकास रुक जाएगा, लेकिन संतुलन बनाकर दोनों संभव हैं। चीन के थार जैसे रेगिस्तान क्षेत्र को हरियाली से भर देने का जिक्र कर उन्होंने कहा कि बाड़मेर में भी ऐसा है।

खनन और ग्रीन बेल्ट पर सख्ती खनन कंपनियों द्वारा ग्रीन बेल्ट लगाने के वादे लेकिन अमल न होने पर सदस्य ने कहा कि एनजीटी के पास ऐसे सैकड़ों मामले आते हैं। कठोर आदेश जारी किए गए हैं कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और डीएफओ (वन अधिकारी) इसकी निगरानी करें। कंपनियों के सीएसआर फंड को पर्यावरण प्रबंधन और स्थानीय विकास में लगाया जाए।खनन क्लोजर प्लान में सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि खनन समाप्ति के बाद भूमि का पुनर्वास (रिक्लेमेशन) अनिवार्य है। माइनिंग के विभिन्न चरणों (25%, 50%, 75%, 100%) पर मॉनिटरिंग होनी चाहिए। बालू खनन जैसी परियोजनाओं के लिए कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) जरूरी है।शहरी ट्रैफिक प्रदूषण पर भी जोर देते हुए कहा कि अनावश्यक हॉर्न बजाना, शोर और वाहन चालू रखना रोका जाए। पुलिस को ट्रेनिंग और जागरूकता अभियान की जरूरत है।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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