पत्नी ने खोले पुलिस अफसर के कथित राज, अवैध संबंधों से लेकर दूसरी शादी तक के आरोप

पश्चिमी राजस्थान के एक जिले में एक पुलिस अधिकारी की पत्नी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका आरोप है कि उसके पति ने बिना तलाक दिए दूसरा विवाह कर लिया, वर्षों तक मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना की, कई महिलाओं से अवैध संबंध रखे और दहेज की मांग की। महिला ने ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित सबूत भी सौंपे हैं, जबकि अधिकारी की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Ashok Shera
Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026Editor
July 1, 2026 • 11:57 AM | राजस्थान 1.4k
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पत्नी ने खोले पुलिस अफसर के कथित राज, अवैध संबंधों से लेकर दूसरी शादी तक के आरोप
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1 Jul 2026
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पत्नी ने खोले पुलिस अफसर के कथित राज, अवैध संबंधों से लेकर दूसरी शादी तक के आरोप

पश्चिमी राजस्थान के एक जिले में तैनात एक पुलिस अधिकारी के विरुद्ध उनकी पत्नी ने गंभीर पारिवारिक एवं नैतिक आरोप लगाए हैं। इस मामले ने न केवल एक परिवार के भीतर के कलह को सार्वजनिक किया है, बल्कि पुलिस व्यवस्था के भीतर जवाबदेही और आचरण जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को भी जन्म दिया है।

महिला का आरोप है कि विवाह के बाद से ही उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि अधिकारी ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए मनमानी की है और अपनी तैनाती के दौरान विभिन्न महिलाओं के साथ अवैध संबंध रखे हैं। इन आरोपों के समर्थन में महिला ने ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्य होने की बात कही है, जिन्हें उन्होंने विभागीय उच्चाधिकारियों को भी सौंपा है।

इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू वैवाहिक स्थिति से जुड़ा है। पत्नी का आरोप है कि अधिकारी ने उनसे कानूनी रूप से तलाक लिए बिना ही दूसरी महिला के साथ विवाह कर लिया है। इसके अतिरिक्त, महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और दुर्व्यवहार करने का भी आरोप लगाया है। पिछले चार वर्षों से पति-पत्नी के अलग रहने के कारण उनके दो बच्चों का भविष्य भी इस पारिवारिक संकट से गहरे रूप से प्रभावित हुआ है।

प्रशासनिक स्तर पर महिला की शिकायत है कि उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी शिकायतों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। 

वर्तमान में ये सभी आरोप महिला द्वारा लगाए गए हैं। पुलिस अधिकारी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया या आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। कानूनी रूप से किसी भी व्यक्ति को तब तक निर्दोष ही माना जाता है जब तक कि आरोप न्यायालय में सिद्ध न हो जाएं। इस मामले की निष्पक्ष जांच और उचित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तथ्यों की सत्यता स्पष्ट हो पाएगी।

इस पूरे प्रकरण ने कानून के रखवाले पर सवाल उठाते हुए समाज में न्याय और नैतिकता के प्रति विश्वास के विषय पर गंभीर चर्चा को प्रेरित किया है।

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