99 लाख की सब्सिडी लौटाने वाले मंत्री... आखिर क्यों वापस करने पड़े पैसे?

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने खीरे की व्यावसायिक खेती के लिए मिली करीब 99 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी वापस कर दी है। संसद में सरकार ने बताया कि यह राशि संबंधित बैंक को लौटा दी गई है, जिसे अब राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) को भेजा जाएगा। यह मामला सब्सिडी मिलने के बाद उठे विवाद के कारण चर्चा में आया था। हालांकि मंत्री का कहना है कि उन्होंने योजना के लिए 2018 में, मंत्री बनने से पहले आवेदन किया था और पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई थी।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Editor
July 29, 2026 • 3:15 PM  208
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99 लाख की सब्सिडी लौटाने वाले मंत्री... आखिर क्यों वापस करने पड़े पैसे?
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99 लाख की सब्सिडी लौटाने वाले मंत्री... आखिर क्यों वापस करने पड़े पैसे?

करीब एक महीने पहले जिस मामले ने देश की राजनीति और कृषि जगत में हलचल मचा दी थी, अब उसी कहानी में नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने खीरे की खेती के लिए मिली करीब 99 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी वापस कर दी है। यह जानकारी केंद्र सरकार ने संसद में दी है। सवाल अब सिर्फ सब्सिडी का नहीं, बल्कि उस फैसले का है जिसने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।

लोकसभा में सरकार की ओर से दिए गए लिखित जवाब में बताया गया कि भागीरथ चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी की राशि लौटा दी है। इसके बाद बैंक को निर्देश दिए गए हैं कि यह राशि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) को वापस भेजी जाए।

यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब खुलासा हुआ कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रहते हुए भागीरथ चौधरी को उनके खीरे की व्यावसायिक खेती (Commercial Cucumber Farming) परियोजना के लिए लगभग 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिली थी। यह सहायता मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना से दी गई थी, जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन संचालित होती है।

इस मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मुद्दा बताते हुए सवाल उठाए थे। हालांकि, भागीरथ चौधरी ने उस समय कहा था कि उन्होंने इस योजना के लिए 2018 में आवेदन किया था, यानी मंत्री बनने से पहले। उनका कहना था कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई, उन्होंने कोई जानकारी नहीं छिपाई और वे वर्षों से खेती कर रहे हैं।

सरकारी जवाब में यह भी बताया गया कि पिछले पांच वर्षों में राजस्थान के एक अन्य भाजपा सांसद लुम्बाराम चौधरी को भी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत वित्तीय सहायता मिली थी।

NHB की इस योजना का उद्देश्य किसानों को बड़े स्तर पर व्यावसायिक बागवानी, सब्जियों और फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक, अधिकतम 1 करोड़ रुपये प्रति परिवार की वित्तीय सहायता दी जा सकती है।

अब जबकि भागीरथ चौधरी ने पूरी सब्सिडी लौटा दी है, राजनीतिक बहस भले कुछ समय के लिए शांत होती दिख रही हो, लेकिन कई सवाल अभी भी कायम हैं। क्या यह फैसला सिर्फ विवाद खत्म करने के लिए लिया गया या भविष्य में ऐसी योजनाओं के नियमों में भी बदलाव देखने को मिलेगा? आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर सरकार और विपक्ष की अगली रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।

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