कांग्रेस में मेवाराम जैन की वापसी के बाद आपत्तिजनक पोस्टर कांड की जांच तेज, बालोतरा से मिले सुरागों पर पुलिस की तीन टीमें जुटीं
बाड़मेर में पूर्व विधायक मेवाराम जैन की कांग्रेस वापसी के बाद लगे आपत्तिजनक पोस्टरों की जांच में पुलिस की तीन टीमें जुटी हैं, लेकिन अभी तक दोषियों का पता नहीं चला। बालोतरा से मिले सुरागों के आधार पर जांच तेज, एसपी नरेंद्र मीना कर रहे मॉनिटरिंग।
राजस्थान के बाड़मेर जिले में पूर्व विधायक मेवाराम जैन की कांग्रेस में वापसी के बाद शुरू हुआ पोस्टर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगे आपत्तिजनक होर्डिंग्स और पोस्टरों की गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस की तीन विशेष टीमें दिन-रात जांच में जुटी हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन पोस्टरों को किसने और क्यों लगाया। पुलिस को बालोतरा से कुछ अहम सुराग मिले हैं, और जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। इस मामले की मॉनिटरिंग खुद बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नरेंद्र सिंह मीना कर रहे हैं।
कांग्रेस में वापसी और विवाद की शुरुआत
मेवाराम जैन, जो पहले अश्लील वीडियो और अनुशासन उल्लंघन के आरोपों के चलते कांग्रेस से निलंबित किए गए थे, को 22 सितंबर 2025 को राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर रंधावा ने ज्वाइन लेटर देकर पार्टी में वापस लिया। करीब 21 महीने के निष्कासन के बाद उनकी इस वापसी ने बाड़मेर में सियासी हलचल मचा दी। जैन के समर्थकों ने जहां उनकी वापसी का स्वागत किया, वहीं विरोधियों ने दिल्ली में पार्टी नेतृत्व के समक्ष विरोध दर्ज कराया।
विवाद तब और बढ़ गया, जब 27 सितंबर को मेवाराम जैन के बाड़मेर दौरे से पहले शहर, बायतु, और बालोतरा में उनके खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए। इन पोस्टरों पर लिखा था, "बाड़मेर हुआ शर्मसार, महिलाओं का अपमान नहीं सहेगी बाड़मेर की कांग्रेस, बलात्कारी हमें स्वीकार नहीं।" पोस्टरों में जिला कांग्रेस कमेटी बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा का नाम भी लिखा था, जिसके बाद कांग्रेस संगठनों में हड़कंप मच गया। बाड़मेर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष गफूर अहमद, जैसलमेर के जिलाध्यक्ष उम्मेद सिंह तंवर, और अन्य नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया कि इन पोस्टरों का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।