मनरेगा पर 'प्रहार' के खिलाफ मंच पर 'हुंकार': गीतों और नृत्य के जरिए मजदूरों ने नए कानून को बताया करोड़ों से विश्वासघात

जयपुर के शहीद स्मारक पर अरुणा रॉय, निखिल डे और कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में मजदूरों ने मनरेगा को खत्म करने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गीतों और नृत्य के जरिए अपना विरोध जताते हुए नए कानून VB-GRAM-G को रद्द करने की मांग की। वक्ताओं ने इसे करोड़ों ग्रामीणों के साथ "ऐतिहासिक विश्वासघात" बताया और कहा कि दिसंबर 2025 से लागू होने वाला यह नया बिल मजदूरों का कानूनी अधिकार छीनकर उन्हें केंद्र सरकार की मर्जी पर निर्भर कर देगा। उनकी मुख्य मांग मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल रखने की है।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
February 2, 2026 • 2:54 PM  9
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मनरेगा पर 'प्रहार' के खिलाफ मंच पर 'हुंकार': गीतों और नृत्य के जरिए मजदूरों ने नए कानून को बताया करोड़ों से विश्वासघात
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2 Feb 2026
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मनरेगा पर 'प्रहार' के खिलाफ मंच पर 'हुंकार': गीतों और नृत्य के जरिए मजदूरों ने नए कानून को बताया करोड़ों से विश्वासघात

जयपुर: राजस्थान की राजधानी आज एक अलग ही किस्म के 'प्रतिरोध' की गवाह बनी। जयपुर का शहीद स्मारक केवल नारों से नहीं, बल्कि ढोलक की थाप और लोकगीतों की गूंज से भी सराबोर था। मौका था 'मजदूर महापंचायत' का, जहाँ राजस्थान के कोने-कोने से आए हजारों ग्रामीण मजदूरों ने केंद्र सरकार के नए VB-GRAM-G बिल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप है कि दिसंबर 2025 से लागू होने वाला नया VB-GRAM-G बिल मजदूरों के 'कानूनी हक' को छीनकर उसे केंद्र की 'मर्जी और बजट' के हवाले कर देगा, जिससे ग्राम सभाओं की शक्ति पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इस विरोध की खास बात इसका कलात्मक स्वरूप रहा, जहाँ मजदूरों ने मंच पर नाचकर और लोकगीत गाकर यह संदेश दिया कि मनरेगा उनके लिए केवल रोजगार नहीं बल्कि जीने का सम्मान है। प्रदर्शन के दौरान मांग की गई कि केंद्र सरकार इस केंद्रीकृत और मजदूर-विरोधी कानून को तुरंत रद्द करे और मनरेगा को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करे, वरना यह आंदोलन पूरे देश में ग्रामीण आक्रोश की नई लहर पैदा करेगा।

मनरेगा बनाम VB-GRAM-G: क्या है विवाद की जड़?

प्रदर्शनकारियों और सामाजिक संगठनों का सीधा आरोप है कि केंद्र सरकार दिसंबर 2025 से मनरेगा (MGNREGA) को समाप्त कर जो नया कानून लाने जा रही है, वह करोड़ों मजदूरों के साथ एक "ऐतिहासिक विश्वासघात" है। सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय और निखिल डे के अनुसार, मनरेगा ने मजदूरों को 'काम मांगने का कानूनी हक' दिया था, लेकिन नया बिल इस अधिकार को छीनकर रोजगार को केंद्र सरकार की मर्जी और बजट के आवंटन पर निर्भर बना देगा।

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