अमेरिकी टैरिफ से जयपुर की जेम्स एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री में हाहाकार, लाखों की आजीविका पर संकट.
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% टैरिफ ने जयपुर के जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। इस नीति से 2,500 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है, पुराने ऑर्डर रद्द हो रहे हैं, और नए ऑर्डर मिलने में कमी आई है। जयपुर, जो रंगीन रत्नों का सबसे बड़ा केंद्र है, में हजारों कारीगरों की आजीविका खतरे में है। व्यापारी वैकल्पिक बाजारों की तलाश और सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं।
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% टैरिफ ने राजस्थान के जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। विशेष रूप से जयपुर, जो रंगीन रत्नों (कलर्ड जेमस्टोन्स) का देश का सबसे बड़ा केंद्र है, इस नीति से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस टैरिफ वृद्धि के कारण जयपुर के जेम्स एंड ज्वेलरी कारोबार को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे हजारों कारीगरों और श्रमिकों के सामने बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है। उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि अमेरिकी बाजार में मांग घटने और ऑर्डर रद्द होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
टैरिफ का प्रभाव और आर्थिक नुकसान
जयपुर का जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग मुख्य रूप से अमेरिकी बाजार पर निर्भर है, जहां से इस उद्योग को सालाना लगभग 17,500 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। इसमें से 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये का व्यापार केवल अमेरिका के साथ है। अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के कारण भारतीय रत्न और आभूषण अमेरिकी बाजार में महंगे हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी खरीदारों ने नए ऑर्डर देने में कटौती शुरू कर दी है और कई पुराने ऑर्डर भी रद्द हो रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ नीति से राजस्थान के जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को अनुमानित 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह नुकसान 5,000 करोड़ रुपये तक होने की आशंका जताई गई है। जयपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजू मंगोड़ीवाला ने बताया कि पिछले दो महीनों में व्यापार आधा हो गया है, और अगर यही स्थिति रही तो कई छोटे-बड़े व्यापारी और कारीगर आर्थिक संकट का सामना करेंगे।