बालोतरा-बाड़मेर में बजरी संकट का अंत: सस्ती बजरी की राह आसान, EC स्वीकृति से खुला खनन का रास्ता!"
बालोतरा-बाड़मेर में दो साल बाद वैध बजरी खनन को मंजूरी मिली। कनाना में 99 हैक्टेयर क्षेत्र में एक लीजधारक को पर्यावरण स्वीकृति (EC) जारी हुई, जिससे प्रति वर्ष 2,78,438 टन बजरी का खनन होगा। सरकार ने 200 रुपये प्रति टन कीमत तय की, जिससे सस्ती बजरी मिलेगी और अवैध खनन रुकेगा। पचपदरा में 8 और सिणधरी में 4 लीज स्वीकृत हैं।
बालोतरा और बाड़मेर जिलों में लंबे समय से चल रही बजरी की कमी अब जल्द ही खत्म होने वाली है। खनिज विभाग ने इस क्षेत्र में वैध बजरी खनन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बालोतरा के कनाना क्षेत्र में एक लीजधारक को पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance - EC) जारी कर दी गई है। यह स्वीकृति राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) ने प्रदान की है, जो दोनों जिलों के लिए राहत की बड़ी खबर है।
पिछले दो वर्षों से बालोतरा और बाड़मेर में वैध बजरी खनन पूरी तरह बंद था, जिसके कारण अवैध खनन ने जोर पकड़ा और आम लोगों को महंगी दरों पर बजरी खरीदनी पड़ रही थी। बाजार में बजरी की कीमतें 600 से 800 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई थीं, जो आमजन के लिए भारी पड़ रही थी। लेकिन अब सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए नई नीति लागू की है, जिसके तहत बजरी की अधिकतम कीमत 200 रुपये प्रति टन तय की गई है। इससे न केवल बजरी सस्ती होगी, बल्कि अवैध खनन पर भी अंकुश लगेगा।