'गाड़ी फलोदी चली गई, 4 कबाड़ बन गई'... जैसलमेर के चिकित्सा महकमे का वो खुलासा, जिसने उड़ाई सबकी नींद!
जैसलमेर में 104 'जननी एंबुलेंस' की सेवाओं में बड़ी कटौती से गर्भवती महिलाओं और मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मामले पर सफाई देते हुए CMHO ने बताया कि जिले की एक एंबुलेंस फलोदी भेज दी गई है, जबकि चार गाड़ियां खराब होकर कबाड़ में पड़ी हैं। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में समय पर एंबुलेंस न मिलने से लोगों को मजबूरी में महंगे निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जैसलमेर:सोचिए, दूर-दराज के किसी रेतीले धोरे वाले गांव में रात के अंधेरे में किसी गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो जाए। मोबाइल में नेटवर्क भी जैसे-तैसे आता हो और जब उम्मीद के साथ '104' नंबर डायल किया जाए, तो उधर से टका सा जवाब मिले कि गाड़ी उपलब्ध नहीं है। जैसलमेर जैसे विशाल और कठिन भौगोलिक इलाके में यह कोई कपोल-कल्पित कहानी नहीं, बल्कि आज की कड़वी सच्चाई बन चुकी है।
तपती धूप और लंबी दूरियों के बीच जहां 104 'जननी एक्सप्रेस' एंबुलेंस किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जाती, वहीं जिले में इन गाड़ियों का चक्का लगभग थम सा गया है। जब एंबुलेंस कम चलने और मरीजों की सांसें अटकने की शिकायतें बढ़ीं, तो महकमे में खलबली मच गई।
जब इस पूरी लापरवाही पर सीधे जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से सवाल पूछा गया, तो जो जवाब सामने आया उसने स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की हवा निकाल दी। CMHO का कहना है कि व्यवस्था में जो कमी दिख रही है, उसके पीछे मुख्य वजह गाड़ियों की अनुपलब्धता है। उनके मुताबिक जिले के हिस्से की एक 104 एंबुलेंस को तो फलोदी भेज दिया गया है, जबकि चार गाड़ियां लंबे समय से खराब पड़ी हैं और कबाड़ बनकर खड़ी हैं।