539 साल पुरानी परंपरा ने फिर खड़ा किया रहस्य… आसमान में उड़ता चंदा और छतों पर जंग का रोमांच!

बीकानेर अपने 539वें स्थापना दिवस पर आज एक ऐसे रंग में डूबा नजर आया, जहां आसमान पतंगों से भरा था, लेकिन इसके पीछे सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि सदियों पुरानी रहस्यमयी परंपराओं की झलक भी छिपी थी। सुबह से ही शहर की छतों पर शुरू हुई पतंगबाजी और “बोय काट्या” की गूंज ने माहौल को रोमांचक बना दिया, लेकिन असली आकर्षण रहा वह अनोखी रस्म, जो पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही रहस्यमयी मानी जाती है। कहा जाता है कि एक खास परंपरा के तहत आसमान में उड़ने वाला “चंदा” सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि इतिहास और संदेशों का जीवंत प्रतीक है, जो आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है। वहीं घरों के भीतर तैयार हो रहे पारंपरिक व्यंजन और इमली से बने खास पेय ने इस उत्सव को और भी रहस्यमयी और खास बना दिया है। जैसे-जैसे शाम नजदीक आएगी, छतों पर जमा भीड़ और आसमान में चलती पतंगों की जंग एक ऐसा नजारा पेश करेगी, जिसे देखने के लिए हर कोई बेचैन है। लेकिन सवाल यही है—क्या इस परंपरा के पीछे छिपा असली इतिहास आज भी उतना ही रहस्यमयी है जितना सदियों पहले था?

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
April 19, 2026 • 4:08 PM  10
राजस्थान
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539 साल पुरानी परंपरा ने फिर खड़ा किया रहस्य… आसमान में उड़ता चंदा और छतों पर जंग का रोमांच!
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539 साल पुरानी परंपरा ने फिर खड़ा किया रहस्य… आसमान में उड़ता चंदा और छतों पर जंग का रोमांच!

बीकानेर आज अपने 539वें स्थापना दिवस को बेहद धूमधाम, उत्साह और गहरी सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मना रहा है। सुबह होते ही पूरा शहर उत्सव में बदल गया। गलियों, मोहल्लों और खासकर घरों की छतों पर पतंगबाजी का सिलसिला शुरू हो गया, जिसने आसमान को रंग-बिरंगी पतंगों से भर दिया। हर ओर “बोय काट्या” और “लपेट ले” जैसी आवाज़ें गूंज रही हैं, जिससे पूरा माहौल एक बड़े मेले जैसा प्रतीत हो रहा है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस परंपरागत उत्सव में पूरे जोश के साथ शामिल हैं।

यह दिन केवल मनोरंजन या उत्सव का नहीं, बल्कि बीकानेर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को महसूस करने का अवसर भी माना जाता है। शहर की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी उतनी ही जीवंत और महत्वपूर्ण बनी हुई है जितनी पहले थी। हर साल यह दिन लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ता है और एकता का संदेश देता है।

चंदा उड़ाने की 539 साल पुरानी परंपरा

बीकानेर की सबसे अनोखी और ऐतिहासिक परंपराओं में से एक “चंदा उड़ाने” की रस्म आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। माना जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत राव बीकाजी ने की थी। यह लगभग 4 फीट चौड़ा गोलाकार ढांचा होता है, जिसे कागज और सरकंडे से बनाया जाता है और रस्सी की मदद से आसमान में उड़ाया जाता है।

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