भयंकर गर्मी के बीच 22 जिलों में झमाझम बारिश का अलर्ट, जानें अपने जिले का हाल
राजस्थान के 22 जिलों में मौसम विभाग ने बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। बारिश से तापमान में गिरावट और बांधों का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन पिछले 16 सालों में इस बार मानसून सबसे कमजोर रहा, जिसका असर खेती और बिजली पर पड़ रहा है।
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
September 19, 2026 • 1:18 PM 1
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राजस्थान
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19 Sep 2026
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राजस्थान में एक बार फिर से मौसम ने करवट ली है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के अनुसार, आज भी राज्य के 22 जिलों (विशेषकर पश्चिमी राजस्थान) में बारिश का यलो अलर्ट है। इसके अलावा पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
हाल ही में 17 और 18 सितंबर को हुई मूसलाधार बारिश ने प्रदेश को गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी है। जहां डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ के क्षेत्रों में 8 इंच तक भारी बारिश दर्ज की गई, वहीं बीकानेर के कोलायत में भी 70 एमएम (3 इंच) पानी बरसा है। फलोदी, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में भी तूफानी बारिश देखने को मिली है।
डैमों में आया उफान, बीसलपुर सहित कई बांधों का बढ़ा गेज
लगातार हो रही बारिश का सबसे बड़ा फायदा प्रदेश के जलस्रोतों को मिला है। नदियों में पानी की जोरदार आवक के चलते प्रमुख बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है:
माही बजाज सागर: जलस्तर 274.85 से बढ़कर 274.95 आरएल मीटर हुआ।
बीसलपुर बांध: गेज 314.03 से 314.05 आरएल मीटर तक पहुंच गया।
अन्य बांध: डूंगरपुर के सोमकमला अंबा (10.80 आरएल मीटर), उदयपुर के जयसमंद (4.72 आरएल मीटर) और प्रतापगढ़ के जाखम बांध (27.20 आरएल मीटर) के जलस्तर में भी अच्छा उछाल आया है।
दिन और रात के तापमान में बड़ी गिरावट, सर्दी की दस्तक
इस बारिश ने राजस्थान में मौसम पूरी तरह सुहावना कर दिया है। दिन के तापमान में 6 डिग्री तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कोटा में पारा 6 डिग्री तो जयपुर में लगभग 4.7 डिग्री सेल्सियस तक नीचे आ गया है। रातों में अब हल्की ठंडक महसूस होने लगी है। सीकर, अजमेर और सिरोही जैसे शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला गया है।
16 साल का सबसे सूखा मानसून: बारिश के आंकड़ों ने चौंकाया
भले ही सितंबर में बादल बरस रहे हों, लेकिन ओवरऑल मानसून के लिहाज से यह साल निराशाजनक रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में पिछले 16 सालों में यह सबसे कमजोर मानसून रहा है। राज्य में औसत बारिश 435.6 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन अब तक केवल 345.8 मिलीमीटर ही पानी बरसा है, जो कि सामान्य से 18% कम है। इससे पहले साल 2009 में इतनी कम (42.8% कम) बारिश हुई थी।
इन जिलों में रहा सबसे ज्यादा सूखा:
जालोर और पाली: -51%
जैसलमेर: -48%
बांसवाड़ा: -47%
सिरोही: -44% (नोट: अलवर, भरतपुर, दौसा, नागौर जैसे कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है।)
खेती और बिजली पर पड़ रहा है मानसून की बेरुखी का असर
बारिश कम होने का सीधा असर किसानों और आम जनजीवन पर पड़ रहा है।
कृषि पर संकट: कम बारिश के कारण ग्वार, मूंग और मोठ जैसी खरीफ फसलों के उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है। इस साल 165.39 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य था, लेकिन केवल 154 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो पाई। पश्चिमी राजस्थान के किसान इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
बिजली की बढ़ती डिमांड: अगस्त और सितंबर (शुरुआती हफ्ते) में बारिश न होने और तापमान (बाड़मेर में 40.8 डिग्री तक) बढ़ने से बिजली की खपत बेतहाशा बढ़ी है। बिजली विभाग के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार 1000 लाख यूनिट अतिरिक्त बिजली की मांग बढ़ी है।
मौसम विभाग के अनुसार 30 सितंबर तक मानसून की विदाई हो जाएगी और उससे पहले अब किसी बहुत तेज या लगातार बारिश के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।