कूड़ेदान में भूख से तड़पता नवजात! एक मां की क्रूरता, एक महिला की ममता ने बचाई मासूम की जान.

बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ के मोमासर बास में एक दिन के नवजात को मां ने लाल कंबल में लपेटकर कूड़ेदान में फेंक दिया। भूख-ठंड से बिलखते बच्चे की आवाज सुनकर गुजर रही महिला ने उसे बचाया और अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ IPC 317 व POCSO के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बच्चा अब SNCU में सुरक्षित है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
October 29, 2025 • 4:11 PM  30
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कूड़ेदान में भूख से तड़पता नवजात! एक मां की क्रूरता, एक महिला की ममता ने बचाई मासूम की जान.
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कूड़ेदान में भूख से तड़पता नवजात! एक मां की क्रूरता, एक महिला की ममता ने बचाई मासूम की जान.

बीकानेर, 29 अक्टूबर 2025: राजस्थान के बीकानेर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो मानवता को शर्मसार करने के साथ-साथ दिल को झकझोर देने वाली है। एक निर्दयी मां ने मात्र 24 घंटे के अपने नवजात बेटे को लाल कंबल में लपेटकर कूड़ेदान में फेंक दिया, जहां वह भूख और ठंड से बिलख-बिलख कर रो रहा था। लेकिन किस्मत ने करवट ली और एक राहगीर महिला की संवेदनशील कानों ने उसकी करुण पुकार सुनी। महिला ने तुरंत कूड़ेदान खोला, तो सामने आया दिल दहला देने वाला दृश्य—एक मासूम नवजात, कचरे के ढेर में तड़पता हुआ। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

 घटना का पूरा विवरण: कैसे बची मासूम की जान?

यह हृदयविदारक घटना बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र के मोमासर बास गांव में मंगलवार (28 अक्टूबर) की शाम को घटी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शाम के समय एक महिला अपने दैनिक कामकाज से लौट रही थी। तभी उसे कूड़ेदान के पास से कुछ असामान्य आवाजें सुनाई दीं—एक नवजात शिशु की भूख और दर्द भरी रोने की पुकार। महिला ने हिम्मत जुटाई और कूड़ेदान के ढक्कन को खोला। अंदर का नजारा देखकर वह सन्न रह गई। कचरे के बीच लाल रंग के कंबल में लिपटा एक दिन का नवजात लड़का फूट-फूटकर रो रहा था। उसका चेहरा भूख से पीला पड़ चुका था और छोटे-छोटे हाथ-पैर ठंड से सिकुड़ गए थे।महिला ने तुरंत शिशु को कूड़ेदान से बाहर निकाला और आसपास के लोगों को सूचना दी। ग्रामीणों की मदद से शिशु को तत्काल श्रीडूंगरगढ़ उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने बताया कि नवजात की हालत गंभीर थी—भूख, डिहाइड्रेशन और ठंड के कारण वह बेहद कमजोर हो चुका था। लेकिन समय पर पहुंचने से डॉक्टरों ने उसे बचा लिया। फिलहाल, शिशु को अस्पताल के विशेष नवजात शिशु इकाई (SNCU) में रखा गया है, जहां उसे दूध, गर्माहट और दवाओं के जरिए इलाज दिया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि अगर दो-चार घंटे और देरी हो जाती, तो मासूम की जान पर बन आती।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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