साइकिल पर सवार पर्यावरण योद्धा: सुबोध विजय की अनूठी यात्रा, माउंट एवरेस्ट तक का सपना
26 वर्षीय सुबोध विजय, महाराष्ट्र के रोहा गांव से, पर्यावरण जागरूकता के लिए साइकिल यात्रा पर हैं। 11 महीने पहले लद्दाख के उमलिंग ला पास से शुरू हुई इस यात्रा में वे अब तक 6 राज्यों में 30 हजार से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं। उनका लक्ष्य 28 राज्यों की यात्रा, 1 लाख पौधे लगाना और माउंट एवरेस्ट फतेह करना है। हर राज्य की मिट्टी साथ ले जाते हैं, जिसे वे एवरेस्ट पर बिखेरेंगे। बाड़मेर में पौधारोपण और जागरूकता कार्यक्रम के बाद वे पाली रवाना हुए। यात्रा में वे अकेले हैं, वॉलंटियर और गाइड का काम करके खर्च चलाते हैं।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जंग में एक 26 वर्षीय युवा, सुबोध विजय, साइकिल पर सवार होकर देशभर में पर्यावरण जागरूकता का संदेश फैला रहा है। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के रोहा गांव के रहने वाले सुबोध ने 11 महीने पहले लद्दाख के उमलिंग ला पास से अपनी साइकिल यात्रा शुरू की थी। उनका लक्ष्य है देश के 28 राज्यों की यात्रा करते हुए 1 लाख पौधे लगाना और माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर पर्यावरण संतुलन का संदेश देना। अब तक वे 6 राज्यों में 30 हजार से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं और हर राज्य की मिट्टी को साथ लेकर अपनी यात्रा को और भी प्रतीकात्मक बना रहे हैं।
सुबोध के पिता विजय एक किसान हैं, मां कुंदा गृहणी हैं, और बड़ा भाई सुमेद सैमसंग में मार्केटिंग जॉब करता है। प्रकृति के प्रति उनका प्रेम बचपन से ही रहा। पहाड़ों से घिरे अपने गांव में पले-बढ़े सुबोध कहते हैं, "प्रकृति ने मुझे जीना सिखाया। टीचर या किताबें जो नहीं सिखा सकतीं, वह प्रकृति सिखा देती है।" पर्यावरण के प्रति जागरूकता और प्रकृति के प्रति उनका लगाव ही इस अनूठी यात्रा की प्रेरणा बना।
19 जून 2024 को लद्दाख के -25 डिग्री तापमान वाले उमलिंग ला पास से शुरू हुई यह यात्रा अब तक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक पहुंच चुकी है। सुबोध हर दिन औसतन 120 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उनकी साइकिल पर स्लीपिंग बैग, जरूरी दस्तावेज, साइकिल सुधारने के औजार, कपड़े, ड्राइफ्रूट और हर राज्य के धार्मिक स्थलों की मिट्टी के पैकेट होते हैं। इस मिट्टी को वे माउंट एवरेस्ट पर बिखेरकर पर्यावरण संतुलन का संदेश देना चाहते हैं।