सर्दियों में रजाई या कंबल से मुंह ढंककर सोने की आदत: आरामदायक लगती है, लेकिन कितनी सुरक्षित?
सर्दियों में ठंड से बचने के लिए रजाई या कंबल से मुंह ढंककर सोना आरामदायक लगता है, लेकिन इससे ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और CO2 दोबारा सांस में चली जाती है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, स्वस्थ वयस्कों में गंभीर खतरा कम है, लेकिन सुबह सिरदर्द, थकान, नींद खराब होना और त्वचा-अस्थमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शिशुओं, बच्चों और सांस की बीमारी वालों के लिए यह खतरनाक है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि मुंह-नाक खुला रखें और ब्रिदेबल कंबल या आई मास्क जैसे विकल्प अपनाएं।
सर्दियां आते ही ठंड से बचने के लिए कई लोग रजाई या कंबल में पूरा मुंह छिपाकर सोने लगते हैं। यह आदत बहुत आरामदायक और सुरक्षित महसूस होती है – अंधेरा हो जाता है, ठंड नहीं लगती, और नींद जल्दी आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकती है? हाल के वर्षों में कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रिसर्च ने इस पर चिंता जताई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि मुंह ढंककर सोने से क्या होता है, कितने जोखिम हैं, और डॉक्टर क्या सलाह देते हैं।
क्यों होती है यह आदत आम? ठंड से बचाव: सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए लोग पूरा सिर ढंक लेते हैं। अंधेरा और शांति: रजाई के नीचे रोशनी और आवाज कम हो जाती है, जो नींद लाने में मदद करती है। बचपन की आदत: कई लोग बचपन से ऐसा करते आ रहे हैं, क्योंकि यह सुरक्षित और cozy लगता है। लेकिन रजाई या कंबल के नीचे एक छोटा-सा जगह बन जाती है, जहां हवा का प्रवाह सीमित हो जाता है।
क्या होता है मुंह ढंककर सोने से? वैज्ञानिक तथ्यजब आप मुंह और नाक ढंककर सोते हैं, तो आप सांस से निकली हुई हवा को बार-बार अंदर लेते हैं। इसे रीब्रीदिंग (Rebreathing) कहते हैं। इससे:ऑक्सीजन का स्तर कम होता है: सामान्य हवा में ऑक्सीजन करीब 21% होती है। रजाई के नीचे यह जल्दी 18-19% तक गिर सकती है। कुछ अध्ययनों में यह 16-18% तक भी दर्ज किया गया है। कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) बढ़ जाती है: सांस से निकली CO2 दोबारे अंदर जाती है, जो 0.04% से बढ़कर 1-4% तक हो सकती है। नमी और गर्मी बढ़ना: मुंह-नाक के आसपास नमी जमा हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया और धूल आसानी से सांस में चले जाते हैं। एक पुराने लेकिन महत्वपूर्ण अध्ययन (1990 के दशक का) में पाया गया कि एक या दो कंबल से सिर ढंकने पर ऑक्सीजन 20.9% से 18% तक गिर जाती है और CO2 2% तक बढ़ जाती है – सिर्फ एक मिनट में! हालांकि, यह स्वस्थ वयस्कों में बहुत गंभीर नहीं होता, क्योंकि शरीर खुद कंबल हटा लेता है अगर CO2 ज्यादा बढ़ जाए। लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से नींद की क्वालिटी प्रभावित होती है।नोट: सोशल मीडिया पर वायरल दावा कि "ऑक्सीजन 20% तक कम हो जाती है" थोड़ा अतिरंजित है। ऑक्सीजन का प्रतिशत 2-4% तक कम होता है (21% से 17-19%), न कि 20% कम। लेकिन प्रभाव निश्चित रूप से पड़ता है।