इंडिया गठबंधन ने चुना गैर-राजनीतिक चेहरा, 9 सितंबर को होगा मुकाबला ,बी. सुदर्शन रेड्डी बने विपक्ष के उम्मीदवार, राधाकृष्णन से होगी टक्कर

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के लिए इंडिया गठबंधन ने पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया, जबकि एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को चुना। 9 सितंबर को होने वाले इस वैचारिक मुकाबले में नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त है।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 19, 2025 • 4:04 PM  246
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इंडिया गठबंधन ने चुना गैर-राजनीतिक चेहरा, 9 सितंबर को होगा मुकाबला ,बी. सुदर्शन रेड्डी बने विपक्ष के उम्मीदवार, राधाकृष्णन से होगी टक्कर
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इंडिया गठबंधन ने चुना गैर-राजनीतिक चेहरा, 9 सितंबर को होगा मुकाबला ,बी. सुदर्शन रेड्डी बने विपक्ष के उम्मीदवार, राधाकृष्णन से होगी टक्कर

देश के आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। यह ऐलान मंगलवार, 19 अगस्त 2025 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। इस फैसले के साथ ही 9 सितंबर को होने वाला उपराष्ट्रपति चुनाव रोमांचक और विचारधारा की जंग का मैदान बन गया है। विपक्ष का यह कदम एक गैर-राजनीतिक और सम्मानित चेहरे को सामने लाकर सत्तारूढ़ एनडीए को कड़ी चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

बी. सुदर्शन रेड्डी: कानून और न्याय के प्रतीक

जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को आंध्र प्रदेश (वर्तमान तेलंगाना) के रंगा रेड्डी जिले के अकुला मायलारम गांव में एक किसान परिवार में हुआ। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और 1971 में हैदराबाद में आंध्र प्रदेश बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकृत हुए। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने सिविल और संवैधानिक मामलों में प्रैक्टिस की। उनकी निष्पक्षता और कानूनी विशेषज्ञता ने उन्हें जल्द ही पहचान दिलाई।

जस्टिस रेड्डी को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के लिए उनके प्रगतिशील दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उन्हें "भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक" बताते हुए कहा, "रेड्डी ने अपने फैसलों में हमेशा गरीबों का पक्ष लिया और संविधान की रक्षा की। उनकी उम्मीदवारी एक वैचारिक लड़ाई का प्रतीक है।"

उपराष्ट्रपति चुनाव: साउथ बनाम साउथ की जंग

विपक्ष के इस कदम ने उपराष्ट्रपति चुनाव को दक्षिण भारत के दो दिग्गजों के बीच रोचक मुकाबले में बदल दिया है। सत्तारूढ़ एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु के वरिष्ठ बीजेपी नेता सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है। राधाकृष्णन, जो आरएसएस से लंबे समय से जुड़े हैं, दो बार कोयंबटूर से लोकसभा सांसद रह चुके हैं और झारखंड के राज्यपाल के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा, "एनडीए ने जहां संगठन से जुड़े नेता को चुना, वहीं हमने सुप्रीम कोर्ट से एक सम्मानित चेहरा सामने लाया है।" इंडिया गठबंधन ने रेड्डी के चयन में एकता का संदेश देने की कोशिश की है। टीएमसी ने गैर-राजनीतिक उम्मीदवार की वकालत की थी, जबकि डीएमके दक्षिण भारत से किसी चेहरे की मांग कर रहा था। रेड्डी का चयन इन दोनों मांगों को पूरा करता है।

चुनावी समीकरण और चुनौतियां

उपराष्ट्रपति का चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली के तहत होता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसद मतदान करते हैं। विजेता को कुल वैध वोटों का कोटा (आधे से अधिक) हासिल करना होता है। संख्याबल के हिसाब से एनडीए का पलड़ा भारी माना जा रहा है, क्योंकि उनके पास 427 सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्ष के पास 355 सांसद हैं। हालांकि, विपक्ष का दावा है कि वह एकजुट होकर एनडीए को कड़ी टक्कर देगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी नेताओं से संपर्क कर सर्वसम्मति की कोशिश की थी, लेकिन विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस वैचारिक लड़ाई में पीछे नहीं हटेगा। खरगे ने कहा, "हम चाहते हैं कि देश को ऐसा उपराष्ट्रपति मिले जो संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को मजबूत करे।"

क्यों हो रहा है यह चुनाव?

यह उपराष्ट्रपति चुनाव इसलिए जरूरी हो गया, क्योंकि मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। इसके बाद चुनाव आयोग ने 9 सितंबर 2025 को चुनाव की तारीख घोषित की, जिसमें नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त है।

क्या होगा भविष्य?

9 सितंबर को होने वाला यह चुनाव न केवल दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है, बल्कि यह विचारधारा, एकता और दक्षिण भारत की सियासी ताकत का भी प्रदर्शन है। रेड्डी की सादगी, निष्पक्ष छवि और कानूनी विशेषज्ञता विपक्ष के लिए एक मजबूत हथियार साबित हो सकती है, जबकि राधाकृष्णन का राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समर्थन एनडीए को बढ़त दिला सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या विपक्ष अपनी एकता को बनाए रख पाएगा या एनडीए की रणनीति भारी पड़ेगी।

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