बांग्लादेश-नेपाल-पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल से अलवर के प्याज किसानों पर संकट: 500 करोड़ का नुकसान, गोदामों की कमी से आत्महत्या के कगार पर

बांग्लादेश-नेपाल की राजनीतिक उथल-पुथल से अलवर के प्याज किसानों को 500 करोड़ का नुकसान; निर्यात बंद, गोदाम न होने से फसल सड़ रही, किसान आत्महत्या को मजबूर।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
November 12, 2025 • 3:19 PM  96
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बांग्लादेश-नेपाल-पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल से अलवर के प्याज किसानों पर संकट: 500 करोड़ का नुकसान, गोदामों की कमी से आत्महत्या के कगार पर
“बांग्लादेश-नेपाल-पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल से अलवर के प्याज किसानों पर संकट: 500 करोड़ का नुकसान, गोदामों की कमी से आत्महत्या के कगार पर”
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बांग्लादेश-नेपाल-पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल से अलवर के प्याज किसानों पर संकट: 500 करोड़ का नुकसान, गोदामों की कमी से आत्महत्या के कगार पर

बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान में हालिया राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट की घटनाओं ने भारत के प्याज निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा राजस्थान के अलवर जिले के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। अलवर, जो देश की दूसरी सबसे बड़ी प्याज मंडी के रूप में जाना जाता है, यहां के हजारों किसानों को पिछले कुछ महीनों में करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। पिछले साल जहां अलवर की लाल प्याज ने 700 करोड़ रुपये का व्यापार किया था, वहीं इस साल यह आंकड़ा घटकर महज 200 करोड़ रह गया है। निर्यात बंद होने से बाजार में प्याज के दाम 1 से 8 रुपये प्रति किलो तक गिर चुके हैं, जबकि विदेशी बाजारों में यही प्याज 70 से 200 रुपये प्रति किलो बिक रही है। ऊपर से आधुनिक गोदामों की भारी कमी के कारण फसल सड़ रही है, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या जैसी चरम कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

संकट की जड़: राजनीतिक उथल-पुथल और निर्यात प्रतिबंध बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद सत्ता में आई अंतरिम सरकार ने भारत से प्याज आयात पर अचानक रोक लगा दी। इसी तरह, नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता के बीच सीमा पर व्यापार बाधित हो गया, जबकि पाकिस्तान के साथ पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के कारण निर्यात सीमित था। इन देशों में प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं—बांग्लादेश में 100 रुपये प्रति किलो, नेपाल में 70-100 रुपये, और पाकिस्तान में 200 रुपये प्रति किलो। लेकिन भारतीय किसानों के लिए ये बाजार अब बंद हैं।केंद्रीय सरकार ने भी घरेलू बाजार को स्थिर रखने के नाम पर अप्रैल 2024 से प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है, जो बार-बार बढ़ाया जा रहा है। इसका असर अलवर जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा पड़ा है। अलवर में हर साल करीब 5-6 लाख टन लाल प्याज का उत्पादन होता है, जो मुख्य रूप से निर्यात पर निर्भर रहता है। इस साल फसल अच्छी हुई, लेकिन बाजार की कमी से किसान परेशान हैं। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार, "निर्यात बंद होने से 80% प्याज का बाजार प्रभावित हुआ है। किसानों की लागत 15-20 रुपये प्रति किलो है, लेकिन बिक्री 5-8 रुपये में हो रही है।"

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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